शनिवार, 30 मार्च 2013

बसंत पंचमी



बसंत पंचमी का महत्व

भारत में जीवन के हर पहलू को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है | और इसी आधार पर पूजा - उपासना की व्यवस्था की गयी है | अगर धन के लिए दीपावली पर माता लक्ष्मी की उपासना की जाती है तो नेघा और बुद्धि के लिए माघ शुक्ल पंचमी को माता सरस्वती की भी उपासना की जाती है | धार्मिक और प्राकृतिक पक्ष को देखे तो इस समय व्यक्ति का मन अत्यधिक चंचल होता है | और भटकाव बड़ता है | इसीलिए इस समय विद्याऔर बुद्धि की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती की उपासना से हम अपने मन को नियंत्रित और बुद्धि को कुशाग्र करते है | वर्तमान संदर्भो की बात करे तो आजकल विधार्थी भटकाव से परेशान है | पढाई में एकाग्रता की समस्या है | और चीजो को लम्बे समय तक याद नहीं रख सकते है , इस दशा में बसंत पंचमी को की गयी माँ सरस्वती की पूजा से न केवल एकाग्रता में सुधार होगा बल्कि बेहतर यादाश्त और बुद्धि की बदोलत विधार्थी परीक्षा में बेहतरीन सफलता भी पायेंगे | विधार्थियों के आलावा बुद्धि का कार्य करने वाले तमाम लोग जैसे पत्रकार , वकील , शिक्षक आदि भी इस दिन का विशेष लाभ ले सकते है |
राशी अनुसार पूजन विधान :-
मेष :- स्वभावत: चंचल राशी होती है | इसीलिए अक्सर इस राशी के लोगो को एकाग्रता की समस्या परेशान करती है | बसंत पंचमी को सरस्वती को लाल गुलाब का पुष्प और सफ़ेद तिल चढ़ा दे | इससे चंचलता और भटकाव से मुक्ति मिलेगी |
वृष:- गंभीर और लक्ष के प्रति एकाग्र होते है परन्तु कभी कभी जिद और कठोरता उनकी शिक्षा और करियर में बाधा उत्पन्न कर देती है | चूँकि इनका कार्य ही आम तौर पर बुद्धि से सम्बन्ध रखने वाला होता है , अत : इनको नीली स्याही वाली कलम और अक्षत सरस्वती को समर्पित करना चाहिए | ताकि बुद्धि सदेव नियंत्रित रहती है |
मिथुन : - बहुत बुद्धिमान होने के बावजूद भ्रम की समस्या परेशान करती है | इसीलिए ये अक्सर समय पर सही निर्णय नहीं ले पाते | बसंत पंचमी के दिन सरस्वती को सफ़ेद पुष्प और पुस्तक अर्पित करने से भ्रम समाप्त हो जाता है एवं बुद्धि प्रखर होती है |
कर्क : - इन पर ज्यादातर भावनाए हावी हो जाती है | यही समस्या इनको मुश्किल में डाले रखती है | अगर बसंत पंचमी के दिन सरस्वती को पीले फूल और सफ़ेद चन्दन अर्पित करे तो भावनाए नियंत्रित कर सफलता पाई जा सकती है |
सिंह : - अक्सर शिक्षा में बदलाव व् बाधाओ का सामना करना पड़ता है | ये योग्यता के अनुसार सही जगह नहीं पहुच पाते है शिक्षा और विधा की बाधाओ से निपटने के लिए सरस्वती को पीले फूल विशेष कर कनेर और धान का लावा अर्पित करना चाहिए |
कन्या : - अक्सर धन कमाने व् स्वार्थ पूर्ति के चक्कर में पड़ जाते है | कभी कभी बुद्धि सही दिशा में नहीं चलती है | बुद्धि सही दिशा में रहे इसके लिए सरस्वती को कलम और दावत के साथ सफ़ेद फूल अर्पित करना चाहिए |
तुला :- जीवन में भटकाव के मौको पर सबसे जल्दी भटकने वाले होते है | चकाचोंध और शीघ्र धन कमाने की चाहत इसकी शिक्षा और करियर में अक्सर बाधा ड़ाल देती है | भटकाव और आकर्षण से निकल कर सही दिशा पर चले इसके लिए नीली कमल और शहद सरस्वती को अर्पित करे |
वृश्चिक : - ये बुद्धिमान होते है | लेकिन कभी कभार अहंकार इनको मुश्किल में ड़ाल देता है | अहंकार और अति आत्म विश्वास के कारण ये परीक्षा और प्रतियोगिता में अक्सर कुछ ही अंको से सफलता पाने से चुक जाते है | इस स्थिति को बेहतर करने के लिए सरस्वती को हल्दी और सफ़ेद वस्त्र अर्पित करना चाहिए |
धनु : - इस राशी के लोग भी बुद्धिमान होते है | कभी कभी परिस्थितिया इनकी शिक्षा में बाधा पहुचाती है | और शिक्षा बीच में रुक जाती है | जिस कारण इन्हें जीवन में अत्यधिक संघर्ष करना पड़ता है | इस संघर्ष को कम करने के लिए इनको सरस्वती को रोली और नारियल अर्पित करना चाहिए |
मकर : - अत्यधिक मेहनती होते है | पर कभी कभी शिक्षा में बाधाओ का सामना करना पड़ता है | और उच्च शिक्षा पाना कठिन होता है | शिक्षा की बाधाओ को दूर करके उच्च शिक्षा प्राप्ति और सफलता प्राप्त करने के लिए इनको सरस्वती को चावल की खीर अर्पित करनी चाहिए |
कुम्भ :- अत्यधिक बुद्धिमान होते है | पर लक्ष के निर्धारण की समस्या इनको असफलता तक पंहुचा देती है | इस समस्या से बचने के लिए और लक्ष पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए इसको बसंत पंचमी के दिन सरस्वती को मिश्री का भोग चडाना चाहिए |
मीन : - इस राशी के लोग सामान्यत : ज्ञानी और बुद्धिमान होते है | पर इनको अपने ज्ञान का बड़ा अहंकार होता है | और यही अहंकार इनकी प्रगति में बाधक बनता है | अहंकार दूर करके जीवन में विनम्रता से सफलता प्राप्त करने के लिए इनको बसंत पंचमी के दिन सरस्वती को पंचामृत समर्पित करना चाहिए |
बसंत पंचमी के दिन अगर हर राशी के जातक इन सरल उपायों को अपनाये तो उनको बागिस्वरी , सरस्वती से नि: संदेह विधा और बुद्धि का वरदान मिलेगा |
कैसे करे सरस्वती आराधना : -
बसंत पंचमी के दिन प्रात: कल स्नान करके पीले वस्त्र धारण करे | सरस्वती का चित्र स्थापित करे यदि उनका चित्र सफ़ेद वस्त्रो में हो तो सर्वोत्तम होगा | माँ के चित्र के सामने घी का दीपक जलाए और उनको विशेष रूप से सफ़ेद फूल अर्पित करे | सरस्वती के सामने बैठ " ऍ सरस्वतये नम : " का कम से कम १०८ बार जप करे | एसा करने से विधा और बुद्धि का वरदान मिलेगा तथा मन की चंचलता दूर होगी |
पूजा अर्चना और उसके लाभ : -
लाल गुलाब , सफ़ेद तिल अर्पित करे तथा अक्षत चढाए |
सफ़ेद पुष्प , पुस्तक अर्पित करे |
पीले फूल , सफ़ेद चन्दन अर्पित करे |
पीले पुष्प , धान का लावा चढाए |
कलम - दवात , सफ़ेद फूल अर्पित करे |
नीली कलम , शहद अर्पित करे |
हल्दी और सफ़ेद वस्त्र अर्पित कर रोली , नारियल अर्पित करे |
चावल की खीर और मिश्री का भोग अर्पित करे |
लाभ : -
मन की स्थिरता और ताजगी महसूस होगी तथा बुद्धि विवेक नियंत्रित होंगे |
मन की कशमकश ख़त्म होगी बुद्धि प्रखर होगी |
भावनाए काबू में रहेगी , सफलता मिलेगी |
शिक्षा में सफलता , बुद्धि में वृद्धि होगी |
बुद्धि तेज , सोच सकारात्मक होगी |
सही दिशा मिलेगी |
अहंकार से मुक्ति मिलेगी |
संघर्ष और बाधाऍ कम होगी |
एकाग्रचित्तता में बढ़ोतरी होगी |

होली पर साधनाए

होली पर साधनाए

सम्पूर्ण भारत वर्ष के लोग विभिन्न रीती रिवाज के अनुसार होली के अवसर को मनाने में गौरव महसूस करते है । वेद पुराणो से लेकर सम्पूर्ण विश्व में भी होली के प्रचलन का पता चलता है । भगवान शिव से लेकर गुरु गोरखनाथ जी ने भी इसे विशेष साधना पर्व कहा जाता है ।
कैसे करे पूजन

एक थाली में कुमकुम , हल्दी , मेहंदी ,साबुत मुंग , अक्षत , अबीर गुलाल , कपूर , फूल ,प्रसाद , घर में बने पकवान , नारियल , फल आदि के अलावा नए वस्त्र का टुकड़ा या कच्चा सूत धुप अगरबत्ती और जल कलश रखे । होलिका को किसी भी प्रकार के पुष्प अर्पित किये जा सकते है । सर्वप्रथम "ॐ श्री गणेशाय नम:" पञ्च बार बोल कर होलिका को जल अर्पित करे । इसके बाद उस पर कुमकुम ,अबीर, गुलाल, हल्दी, मेहंदी तथा अक्षत चढ़ाये । साबुत मुंग प्रसाद , फल भी अर्पित करे । फिर वस्त्र और कच्चा सूत होलिका के चारो और लपेट ले । पुष्प अर्पित करे और होलिका की परिक्रमा करे । परिक्रमा के अंत में बचा हुआ जल भी वाही चढ़ा दे । हाथ जोड़कर पुष्पांजली नमस्कार करे और निम्न मंत्रो का 9 बार उच्चारण करे ।
ॐ होलीकाय नम: ॐ प्रहलादाय नम: ।।
ॐ भगवान न्रसिन्हाय नम:।।
परिक्रमा करते समय अपने और परिवार के कल्याण की कमाना करे । यह भी प्रार्थना करे की होलिका माता हमें आरोग्य दो , शांति दे , हमें हर तरह से सुखी रखे , हम स्वस्थ रहे , प्रसन्नचित रहे । इस व्प्रकार आप जो भी कामना करे , अंत में थोड़े से कपूर को जलाकर होलिका की आरती करे । होलिका दहन के दुसरे दिन सर्वप्रथम अपने इष्ट व् माता पिता , गुरु व् बड़ो को अबीर गुलाल अर्पित करे । अपने घर के इशान कोण का पूजन कर वहा भी गुलाल अर्पित करे । इससे निवास के सभी वष्टु दोष दूर हो जाते है ।
कामना के साथ आराधना

नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति प्राप्त करने हेतु :-
नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति हेतु होलिका दहन के पश्चात् होली की जलती हुई राख लाये । इसे किसी पत्र में रख दे । उसके ऊपर लोबान , शुद्ध गुग्गुल , चन्दन डाले और घर के कोने कोने में घुमाये । अंत में मुख्य दरवाजे पर आ जाये । वह इसे निचे रखकर इसके ऊपर कपूर की तीन गोलिया रखे और जला दे । उनके जल जाने के बाद उसे ढक दे । जिससे हवा से उसकी राख न उड़े । दुसरे दिन प्रात: काल उठकर होलिका की राख पर ठंडा पानी डाल कर उसे जल में प्रवाहित करे या पीपल वृक्ष के नीचे रख दे । आपका घर किसी भी नजर दोष तथा नकारात्मक शक्तियों से मुक्त रहेगा । रोग , शोक दूर होकर सुख समृद्धि मिलेगी ।
व्यापार और कारोबार में सफलता प्राप्ति हेतु :-
यह उपाय उन लोगो के लिए लाभदायक है जो व्यवसाय ठीक से न चल पाने के कारण कर्ज आदि की समस्या से पीड़ित है । 11 गोमती चक्र लाये । धन के बाद होली की राख लाये और दरवाजे के पास किसी चीज से ढक कर रख दे । सोने से पहले इस राख के चारो और जल डाले । गोमती चक्र राख के नीचे दबा दे और रात को पुन: ढंक दे । दुसरे दिन प्रात : राख पर ठन्डे जल के छीटे मारे और दबे हुए गोमती चक्र निकाल कर सुरक्षित रख ले । राख को बहते हुए पानी में प्रवाहित करे या पीपल के वृक्ष के नीचे रख दे । जल का एक छोटा पात्र रखे दीपक प्रज्वलित कर अपने आराध्य के किसी मन्त्र या "ॐ श्री यै नम:" का 108 बार जाप कर प्रणाम कर , गोमती चक्र को लाल वस्त्र में बांधकर अपने तिजोरी में या गल्ले में रख दे इसके बाद पूरी क्षमता से कार्य करे । सकारात्मक सोच रखे व्यवसाय में आ रही बढ़ाये शीघ्र समाप्त हो जाएगी
संतान सम्बन्धी समस्याओं के निराकरण हेतु :-
यदि बच्चो सम्बन्धी किसी कार्यो में रूकावट आ रही हो तो होली के दिन होलिका दहन से पूर्व मंदिर में भगवान कृष्ण की सुंदर पोशाक अर्पित करे । संभव हो तो वह पोशाक भगवान को उसी दिन पहन दे । इसी के साथ संतान के कल्याण की कामना करे । इस से सुख समृद्धि तथा संतान सम्बन्धी कष्टों से छुटकारा मिलेगा ।
रोग मुक्ति हेतु :-
परिवार में यदि कोई असाध्य रोगी है , तो चार गोमती चक्र लाकर उन्हें जल से स्वच्छ करे डंठल सहित 2 पान के पत्ते ले । एक जोड़ा लॉन्ग को को शुद्ध घी में डुबोकर पान के पत्तो पर रखे । और पान के पत्तो को इस प्रकार लपेट ले की की साडी सामग्री अन्दर बंद हो जाये । चाहे तो काले धागे में लपेट सकते है । अब दाये हाथ में चार गोमती चक्र तथा बाए हाथ में पान को लेकर होलिका की अग्नि में डाल दे । होलिका को प्रणाम करे और गोमती चक्र घर ले जाए । वे चारो गोमती चक्र रोगी के पलंग के चारो पायो पर बांध दे । रोगी की जो चिकित्सा चल रही है उसे चलने दे । रोजाना सुबह उठते ही रोगी के स्वास्थ्य की कामना करे , लाभ मिलेगा ।
धन वृद्धि करने हेतु :-
हल्दी मिले पीले चावल ले । चावल किसी डिब्बे में रखे । डिब्बा अगर चंडी का हो तो अति उत्तम । डिब्बे में तीन कमल गट्टे के दाने और ताम्बे का सिक्का रखे और लाल कपडे में लपेट ले । होलिका दहन होने पर डिब्बे के साथ 7 परिक्रमा करे । परिक्रमा करते समय होलिका से प्रार्थना करते जाए । इस डिब्बे को तिजोरी या धन रखने वाली जगह रखे ।
राशी और होली के रंग

मेष :- गहरा लाल , टेसू के फूलो से तैयार पीला रंग ।

वृषभ :- क्रीम , सिल्वर , हरा , नीला कलर खुशबू मिलाकर ।

मिथुन :- हरा , सिल्वर या क्रीम और हल्का नीला ।

कर्क :- हल्का नीला , गुलाबी , सुनहरी या हार सिंगार के फूलो से तैयार ।

सिंह :-सुर्ख पीला या केसरिया , हल्का पीला और गुलाबी रंग ।
कन्या :- गहरा हरा रंग , गहरा नीला , सिल्वर कलर ।

तुला :- हल्का गुलाबी , हल्का नीला , और हरा रंग ।

वृश्चिक :- गहरा लाल रंग , पीला और हल्का नीला रंग ।

धनु :- पीला यी हार सिंगार के फूलो का रंग , गहरा लाल और गहरा कुसुमल रंग ।

मकर :-गहरा नीला , सिल्वर या क्रीम रंग और हरा रंग ।

कुम्भ :-हल्का नीला , हरा और हल्का गुलाबी रंग ।

मीन :- सुनहरी या हार सिंगार के फूलो का रंग , हल्का नीला और गुलाबी ।

होली के अवसर पर दान करते समय सावधानिया

होली , दीपावली , ग्रहण आदि कुछ ऐसे विशेष अवसर होते है । जिन पर सोच समझ कर ही दान करना चाहिए । राशी के अनुसार हमारी दशा अंतर दशा देख कर ही दान करना चाहिए अगर हम सोच समझ कर दान नहीं करे तो उसका विपरीत प्रभाव भी देखने को मिल सकता है ।
अत: आईये जाने की राशियों के अनुसार हमें किस चीज का और क्या दान करना चाहिए ।
बुध की दशा :- अंतर दशा बुध की चल रही हो या बुध गृह कमजोर हो , बुध बलहीन हो या पाप ग्रहों से दृष्ट हो तो आपको हरा वस्त्र , मुंग कपूर , पालक , घी , हरी घास दान करे ।
मंगल की दशा :- मंगल की अन्तर्दशा चल रही हो । मंगल बलहीन और उस पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो तो ताम्बा , सोना , गेहू , लाल वस्त्र , गुड , लाल चन्दन , मसूर की दाल आदि का दान करे ।
चन्द्र की दशा :- चन्द्र की अंतर दशा चल रही हो । चन्द्र बलहीन हो या उस पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो तो तम्बा , सोना , गेहू , दूध , चावल , कपूर , सफ़ेद वस्त्र , चाँदी , शंख , चीनी आदि दान करे ।
राहू की दशा :- राहू की अन्तर्दशा चल रही हो । रहू बलहीन हो या उस पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो । तो लोहा , तिल , पुराना वस्त्र , कम्बल सप्त धान , उड़द , तेल आदि का दान करे ।
गुरु की दशा :- गुरु की अन्तर्दशा चल रही हो या गुरु बलहीन हो । या उस पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो तो पीला वस्त्र , हल्दी , चने की दाल , पपीता , घी , पुस्तक आदि का दान करे ।
केतु की दशा :-केतु की अंतर दशा चल रही हो या केतु बलहीन हो तो तिल का दान , काला वस्त्र , सप्त धान , कम्बल , उड़द , तेल , लोहा आदि दान करे ।
सूर्य की दशा :-सूर्य की अंतर दशा चल रही हो । सूर्य बलहीन हो या उस पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो तो गेंहू , गुड , रक्त चन्दन , लाल वस्त्र , ताम्बा आदि का दान करे ।

शनिवार, 23 मार्च 2013

होली की कुण्डलियाँ: मनायें जमकर होली संजीव 'सलिल'

होली की कुण्डलियाँ:
मनायें जमकर होली
संजीव 'सलिल'
*
होली अनहोली न हो, रखिए इसका ध्यान.
मही पाल बन जायेंगे, खायें भंग का पान.. 
खायें भंग का पान, मान का पान न छोड़ें.
छान पियें ठंडाई, गत रिकोर्ड को तोड़ें..
कहे 'सलिल' कविराय, टेंट में खोंसे गोली.
भोली से लग गले, मनायें जमकर होली..
*
होली ने खोली सभी, नेताओं की पोल. 
जिसका जैसा ढोल है, वैसी उसकी पोल..
वैसी उसकी पोल, तोलकर करता बातें.
लेकिन भीतर ही भीतर करता हैं घातें..
नकली कुश्ती देख भ्रनित है जनता भोली.
एक साथ मिल भत्ते बढ़वा करते होली..
*
होली में फीका पड़ा, सेवा का हर रंग.
माया को भायी सदा, सत्ता खातिर जंग..
सत्ता खातिर जंग, सोनिया को भी भाया.
जया, उमा, ममता, सुषमा का भारी पाया..
मर्दों पर भारी है, महिलाओं की टोली.
पुरुष सम्हालें चूल्हा-चक्की अबकी होली..
*

फागुन के मुक्तक संजीव 'सलिल'

फागुन के मुक्तक
संजीव 'सलिल'
*

बसा है आपके ही दिल में प्रिय कब से हमारा दिल.
बनाया उसको माशूका जो बिल देने के है काबिल..
चढ़ायी भाँग करके स्वांग उससे गले मिल लेंगे-
रहे अब तक न लेकिन अब रहेंगे हम तनिक गाफिल..
*
दिया होता नहीं तो दिया दिल का ही जला लेते.
अगर सजती नहीं सजनी न उससे दिल मिला लेते..
वज़न उसका अधिक या मेक-अप का कौन बतलाये?
करा खुद पैक-अप हम क्यों न उसको बिल दिला लेते..
*
फागुन में गुन भुलाइए बेगुन हुजूर हों.
किशमिश न बनिए आप अब सूखा खजूर हों..
माशूक को रंग दीजिए रंग से, गुलाल से-
भागिए मत रंग छुड़ाने खुद मजूर हों..
*
salil.sanjiv@gmail.com
divyanarmada.blogspot.in

त्रिभंगी छंद: संजीव 'सलिल'

फागुन आये ...
त्रिभंगी छंद:
 संजीव 'सलिल'
*
ऋतु फागुन आये, मस्ती लाये, हर मन भाये, यह मौसम।
अमुआ बौराये, महुआ भाये, टेसू गाये, को मो सम।।
होलिका जलायें, फागें गायें, विधि-हर शारद-रमा मगन-
बौरा सँग गौरा, भूँजें होरा, डमरू बाजे, डिम डिम डम।।

suvichar


*




















धरोहर: ब्राह्म मुहूर्त:स्वस्ति वाचन अज्ञेय

धरोहर:
ब्राह्म मुहूर्त:स्वस्ति वाचन अज्ञेय
 *

जिओ उस प्यार में
जो मैंने तुम्हे दिया है,
उस दुःख में नहीं, जिसे
बेझिझक मैंने पिया है|
उस गान में जिओ
जो मैंने तुम्हे सुनाया है,
उस आह में नहीं, जिसे
मैनें तुमसे छिपाया है|
वह छादन तुम्हारा घर हो
जिसे मैं असीसों से बुनता हूँ, बुनूँगा;
वो कांटे गोखरू तो मेरे हैं
जिन्हें मैं राह से चुनता हूँ, चुनूँगा|
सागर के किनारे तुम्हे पहुँचाने का
उदार उद्यम ही मेरा हो,
फिर वहाँ जो लहर हो, तारा हो,
सोन तरी हो, अरुण सवेरा हो,
वो सब ओ मेरे वर्य! ( श्रेष्ठ )
तुम्हारा हो, तुम्हारा हो, तुम्हारा हो|

दोहा सलिला: होली हो अबकी बरस संजीव 'सलिल'

दोहा सलिला:
होली हो अबकी बरस
संजीव 'सलिल'
*
होली होली हो रही, होगी बारम्बार.
होली हो अबकी बरस, जीवन का श्रृंगार.१.

होली में हुरिया रहे, खीसें रहे निपोर.
गौरी-गौरा एक रंग, थामे जीवन डोर.२.

होली अवध किशोर की, बिना सिया है सून.
जन प्रतिनिधि की चूक से, आशाओं का खून.३.

होली में बृजराज को, राधा आयीं याद.
कहें रुक्मिणी से -'नहीं, अब गुझियों में स्वाद'.४.

होली में कैसे डले, गुप्त चित्र पर रंग.
चित्रगुप्त की चतुरता, देख रहे सबरंग.५.

होली पर हर रंग का, 'उतर गया है रंग'.
जामवंत पर पड़ हुए, सभी रंग बदरंग.६.

होली में हनुमान को, कहें रंगेगा कौन.
लाल-लाल मुँह देखकर, सभी रह गए मौन.७.

होली में गणपति हुए, भाँग चढ़ाकर मस्त.
डाल रहे रंग सूंढ़ से, रिद्धि-सिद्धि हैं त्रस्त.८.

होली में श्री हरि धरे, दिव्य मोहिनी रूप.
ठंडाई का कलश ले, भागे दूर अनूप.९.

होली में निर्द्वंद हैं, काली जी सब दूर.
जिससे होली मिलें हो, वह चेहरा बेनूर.१०.

होली मिलने चल पड़े, जब नरसिंह भगवान्.
ठाले बैठे  मुसीबत गले पड़े श्रीमान.११.

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Sanjiv verma 'Salil'
salil.sanjiv@gmail.com
http://divyanarmada.blogspot.in

शुक्रवार, 22 मार्च 2013

आओ! देखें दुर्लभ चित्र:

समय-पृष्ठ पलटें :
समय के पन्नों को पलटकर कुछ अजाना, कुछ अबूझा, करें साझा ...
उपन्यास सम्राट 



सितम्बर1936 उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद का रामकटोरा, बनारस स्थित घर में रोगशैय्या पर अंतिम चित्र। 'अज्ञेय' द्वारा इस चित्र को लेने के एक माह पश्चात प्रेमचंद का देहावसान हुआ।अज्ञेय की पहली कहानी 'अमर-वल्लरी' प्रेमचंद ने 5 अक्तूबर, 1932के  'जागरण' में  प्रकाशित की थी। अज्ञेय तब, अन्य क्रांतिकारियों के साथ, दिल्ली षड्यंत्र मुकदमे में जेल काट रहे थे, जहाँ से तीन साल बाद छूटे।
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संविधान निर्माता 
 
राष्ट्रकवि और राष्ट्रपति  

 
देशरत्न डॉ। राजेंद्र प्रसाद तत्कालीन राष्ट्रपति को 'संस्कृति के चार अध्याय' की प्रति भेंट करते हुए राष्ट्रकवि दिनकर।
 

सबसे बाएंफणीश्वरनाथ रेणु, रामधारी सिंह दिनकर (वक्ता)। आभार: अखिलेश शर्मा, रांची। 
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सुभाषद्रोही या देशद्रोही?

 

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को विश्व युद्ध अपराधी के रूप में अंग्रेजों को सौंपने पर गाँधी, नेहरु, जिन्ना एकमत: भारत की एकमात्र विश्वस्नीय समाचार सेवा PTI द्वारा दिए समाचार के अनुसार नेताजी के लापता होने संबंधी दुर्घटना की जाँच हेतु गठित खोसला आयोग के समक्ष बयां देते हुए नेताजी के अंगरक्षक रहे उस्मान पटेल ने बताया कि मोहनदास करमचंद गांधी, जवाहरलाल नेहरू, मोहम्मद अली जिन्ना और मौलाना आज़ाद ने अंग्रेज जज से समझौता किया था की नेताजी के मिलने पर उन्हें अंग्रेजोन को सौंपा जायेगा।
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स्वतंत्रता का सच 


 

कृपया निम्न तथ्यों को ध्यान से पढ़िये:-
1. 1942 : ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन ब्रिटिश सरकार ने कुछ हफ्तों में कुचला।2. 1945 : ब्रिटेन ने विश्वयुद्ध में ‘विजयी’ देश के रूप सिंगापुर को वापस अपने कब्जे में लिया। उसका भारत से लेकर सिंगापुर तक जमे रहने का इरादा था। दिल्ली के ‘संसद भवन’ से लेकर अण्डमान के ‘सेल्यूलर जेल’ तक- हर निर्माण 500 से 1000 वर्षों तक सत्ता बनाये रखने के इरादे से किया गया था
3. 1945 - 1946 ब्रिटेन ने हड़बड़ी में भारत छोड़ने का निर्णय लिया? क्यों? क्या घटा इस बीच जिसने अंग्रेजों को पलायन करने पर मजबूर किया?
4. बचपन से सुने - 'दे दी हमें आजादी बिना खड्ग बिना ढाल, साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल' को भुला कर सच जानें इस काल में ‘नेताजी और आजाद हिन्द फौज की सैन्य गतिविधियों के कारण’ ही 1947   में आजादी मिली। विश्वास न हो नीचे दिए गए तथ्य देखें:
***
ब्रिटिश संसद में विपक्षी सदस्य द्वारा प्रश्न पूछने पर कि ब्रिटेन भारत को क्यों छोड़ रहा है, ब्रिटिश प्रधानमंत्री एटली जवाब
दो विन्दुओं में देते हैं:
1. भारतीय मर्सिनरी (वेतनभोगी पेशेवर
सेना) ब्रिटिश राजमुकुट के प्रति वफादार नहीं रही और
2. इंग्लैण्ड इस स्थिति में नहीं है कि वह अपनी खुद की सेना को इतने बड़े पैमाने पर संगठित कर सके कि वह भारत पर नियंत्रण रख सके।
अंग्रेजी इतिहासकार माईकल एडवर्ड के शब्दों में ब्रिटिश राज के अन्तिम दिनों का आकलन:
“भारत सरकार ने आजाद हिन्द सैनिकों पर मुकदमा चलाकर भारतीय सेना के मनोबल को मजबूत बनाने की आशा की थी। इसने उल्टे अशांति पैदा कर दी- जवानों के मन में कुछ-कुछ शर्मिन्दगी पैदा होने लगी कि उन्होंने विदेशियों का साथ दिया। अगर सुभाषचन्द्र बोस और उनके आदमी सही थे- जैसाकि सारे देश ने माना कि वे सही थे भी- तो सेना के भारतीय जरूर गलत थे। भारत सरकार को धीरे-धीरे यह दीखने लगा कि ब्रिटिश राज की रीढ़- भारतीय सेना- अब भरोसे के लायक नहीं रही। सुभाष बोस का भूत, हैमलेट के पिता की तरह, लालकिले (जहाँ आजाद हिन्द सैनिकों पर मुकदमा चला) के कंगूरों पर चलने-फिरने लगा, और उनकी अचानक विराट बन गयी छवि ने उन बैठकों को बुरी तरह भयाक्रान्त कर दिया, जिनसे आजादी का रास्ता प्रशस्त होना था।”
***
निष्कर्ष के रुप में यह कहा जा सकता है कि:-
1. अँग्रेजों के भारत छोड़ने के हालाँकि कई कारण थे, मगर प्रमुख कारण यह था कि भारतीय थलसेना एवं जलसेना के सैनिकों के मन में ब्रिटिश राजमुकुट के प्रति राजभक्ति में कमी आ गयी थी और- बिना राजभक्त भारतीय सैनिकों के- सिर्फ अँग्रेज सैनिकों के बल पर सारे भारत को नियंत्रित करना ब्रिटेन के लिए सम्भव नहीं था।
2. सैनिकों के मन में राजभक्ति में जो कमी आयी थी, उसके कारण थे- नेताजी का सैन्य अभियान, लालकिले में चला आजाद हिन्द सैनिकों पर मुकदमा और इन सैनिकों के प्रति भारतीय जनता की सहानुभूति।
3. अँग्रेजों के भारत छोड़कर जाने के पीछे गाँधीजी या काँग्रेस की अहिंसात्मक नीतियों का योगदान नहीं के बराबर रहा। --जय हिन्द ।
 आभार :- गौरी राय
 

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उन्नीस वर्ष में विश्व विजय:
 
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नेहरु - शास्त्री मूल्यांकन 
 
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सनातन सत्य 
 
 

फागुन त्रिभंगी छंद: संजीव 'सलिल'

फागुन
त्रिभंगी छंद:
 संजीव 'सलिल'
*
ऋतु फागुन आये, मस्ती लाये, हर मन भाये, यह मौसम।
अमुआ बौराये, महुआ भाये, टेसू गाये, को मो सम।।
होलिका जलायें, फागें गायें, विधि-हर शारद-रमा मगन-
बौरा सँग गौरा, भूँजें होरा, डमरू बाजे, डिम डिम डम।।
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Sanjiv verma 'Salil'
salil.sanjiv@gmail.com
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गुरुवार, 21 मार्च 2013

होरी के जे हुरहुरे संजीव 'सलिल' *

होरी के जे हुरहुरेसंजीव 'सलिल'

होरी के जे हुरहुरे, लिये स्नेह-सौगात,
कौनौ पढ़ मुसक्या रहे, कौनौ दिल सहलात।
कौनौ दिल सहलात, किन्हउ  खों चढ़ि गओ पारा,
जिन खों पारा चढ़े, होय उनखों मूं कारा।   
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मुठिया भरे गुलाल से, लै पिचकारी रंग। 
रंग भ्रमर खों मूं-मले, कमल करि रह्यो दंग।। 
कि बोलो सा रा रा रा.....
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सुमिरों मैं परताप खों, मानो मम परताप।
फागुन-भरमायो शिशिर, आग रह्यो है ताप।। 
कि बोलो सा रा रा रा.....
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गायें संग महेस के, किरण-नीरजा फाग।
प्रणव-दीप्ति-आतिश जुरे, फूल-धतूरा पाग।। 
कि बोलो सा रा रा रा.....
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भूटानी-छबि बनी है, नेपाली सी आज।
भंग पिलातीं इंदिरा, कुसुम-किन्शुकी ताज।। 
कि बोलो सा रा रा रा.....
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महिमा की महिमा 'सलिल', मो सें बरनि न जाय।
तज दीन्यो संतोष- पी,  भंग गजब इठलाय ।। 
कि बोलो सा रा रा रा.....
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नभ का रंग परकास के, चेहरे-छाया खूब।
श्यामल घन घनश्याम में, जैसे जाए डूब।। 
कि बोलो सा रा रा रा.....
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गूझों का आनंद लें, लुक-छिप पाठक भाग। 
ओम व्योम से झाँककर, माँग रहे हैं भाग।। 
कि बोलो सा रा रा रा.....
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काट लिए वनकोटि फिर, चाहें पुष्प पलाश। 
ममता औ समता बिना, फगुआ हुआ हताश।। 
कि बोलो सा रा रा रा.....
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