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मंगलवार, 19 सितंबर 2017

bhavani chhand

हिंदी में नए छंद : १.
पाँच मात्रिक याज्ञिक जातीय भवानी छंद
*
प्रात: स्मरणीय जगन्नाथ प्रसाद भानु रचित छंद प्रभाकर के पश्चात हिंदी में नए छंदों का आविष्कार लगभग नहीं हुआ। पश्चातवर्ती रचनाकार भानु जी के ग्रन्थ को भी आद्योपांत कम ही कवि पढ़-समझ सके। २-३ प्रयास भानु रचित उदाहरणों को अपने उदाहरणों से बदलने तक सीमित रह गए। कुछ कवियों ने पूर्व प्रचलित छंदों के चरणों में यत्किंचित परिवर्तन कर कालजयी होने की तुष्टि कर ली। संभवत: पहली बार हिंदी पिंगल की आधार शिला गणों को पदांत में रखकर छंद निर्माण का प्रयास किया गया है। माँ सरस्वती की कृपा से अब तक ३ मात्रा से दस मात्रा तक में २०० से अधिक नए छंद अस्तित्व में आ चुके हैं। इन्हें सारस्वत सभा में प्रस्तुत किया जा रहा है। आप भी इन छंदों के आधार पर रचना करें तो स्वागत है। शीघ्र ही हिंदी छंद कोष प्रकाशित करने का प्रयास है जिसमें सभी पूर्व प्रचलित छंद और नए छंद एक साथ रचनाविधान सहित उपलब्ध होंगे।
भवानी छंद
*
विधान:
प्रति पद ५ मात्राएँ।
पदादि या पदांत: यगण।
सूत्र: य, यगण, यमाता, १२२।
उदाहरण:
सुनो माँ!
गुहारा।
निहारा,
पुकारा।
*
न देखा
न लेखा
कहीं है
न रेखा
कहाँ हो
तुम्हीं ने
किया है
इशारा
*
न पाया
न खोया
न फेंका
सँजोया
तुम्हीं ने
दिया है
हमेशा
सहारा
*
न भोगा
न भागा
न जोड़ा
न त्यागा
तुम्हीं से
मिला है
सदा ही
किनारा
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salil.sanjiv@gmail.com, ९४२५१८३२४४
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#हिंदी_ब्लॉगर

पर्यायवाची शब्द २

क्रमांक वाक्यांश या शब्द-समूह = पर्यायवाची शब्द २.
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२६. जिसके पास कुछ भी न हो =अकिंचन, दरिद्र
२७.जिसके आस बहुत कुछ हो = समृद्ध, धनी, रईस
२८. सूर्योदय / सूर्य निकलना निकलने का समय = पौ फूटना, अलस्सुबह
२९. दोपहर के पूर्व / पहले का समय = पूर्वान्ह, फोरनून, सवेरा, सुबह
२९. दोपहर के बाद का समय = अपराह्न, दोपहर बाद, आफ्टरनून
३०. सूर्यास्त / चंद्रोदय का समय = संध्या, शाम, ईवनिंग
३१. सूर्यास्त / चंद्रोदय के बाद का समय = रात, निशा, रजनी, राका, शब, नाइट
३२. आवश्यक = अनिवार्य, नेसेसरी, एसेन्शिअल
३३. अत्यावश्यक = अपरिहार्य
३४. देहरी पर आटे को घोलकर चित्रकारी करना = अल्पना बनाना
३५. भूमि पर रंगों से चित्रकारी करना = रंगोली डालना
३६. आटे से विशेष आकृति बनाना = चौक पुराना
३५. आरम्भ के बाद = आद्योपरांत
३७. आदि से अन्त तक = आद्यंत
३६. दिशाओं के अंत तक = दिगंत
३७. जिसका परिहार करना सम्भव न हो = अपरिहार्य
३८. जिसका विकल्प न हो = निर्विकल्प
३९. जो ग्रहण करने योग्य न हो = अग्राह्य
४०. जिसे प्राप्त न किया जा सके = अप्राप्य
४१. जिसका उपचार सम्भव न हो = असाध्य
४२. भगवान में विश्वास रखनेवाला = आस्तिक
४३. भगवान में विश्वास न रखनेवाला नास्तिक
४४. भगवन में श्रद्धा रखनेवाला = श्रद्धालु
४५. भगवान् की भक्ति करनेवाला = भक्त, भगवद्भक्त
४६. भजन करनेवाला = भजनीक
४७. पूजा करनेवाला = पुजारी
४८. ध्यान करनेवाला = ध्यानी
४९. ज्ञान रखनेवाला = ज्ञानी
५० अभिमान करने वाला = मानी, अभिमानी
क्रमश:
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