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शुक्रवार, 22 मार्च 2013

फागुन त्रिभंगी छंद: संजीव 'सलिल'

फागुन
त्रिभंगी छंद:
 संजीव 'सलिल'
*
ऋतु फागुन आये, मस्ती लाये, हर मन भाये, यह मौसम।
अमुआ बौराये, महुआ भाये, टेसू गाये, को मो सम।।
होलिका जलायें, फागें गायें, विधि-हर शारद-रमा मगन-
बौरा सँग गौरा, भूँजें होरा, डमरू बाजे, डिम डिम डम।।
*
Sanjiv verma 'Salil'
salil.sanjiv@gmail.com
http://divyanarmada.blogspot.in

1 टिप्पणी:

Mahesh Dewedy ने कहा…

Mahesh Dewedy yahoogroups.com


सुन्दर साहित्यिक फागुनी रचना हेतु बधाई संजीव jee.

महेश चन्द्र द्विवेदी