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शनिवार, 27 नवंबर 2021

पुरोवाक, हाइकु, शशि पुरवार

पुरोवाक :
'जोगिनी गंध' - त्रिपदिक हाइकु प्रवहित निर्बंध
आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
*
भाषा सतत प्रवाहित सलिला की तरह निरंतर परिवर्तनशील होती है। लोकोक्ति है 'बहता पानी निर्मला', जिस नदी में जल स्रोतों से निरंतर ताजा जल नहीं आता और सागर में जल राशि विसर्जित नहीं होती वह नदी सूखकर समाप्त हो जाती है। भाषा और साहित्य भी सतत प्रवाहित नदियों की तरह हैं। जिस भाषा में समयानुकूल नए शब्द नहीं जुड़ते और निरुपयोगी हुए शब्द बाहर नहीं किये जाते, वह मृतप्राय हो जाती है। जिस साहित्य में अन्य भाषाओँ के साहित्य से ग्रहण करने योग्य साहित्य रचने की सामर्थ्य नहीं रहती, वह क्रमश: समाप्त हो।मानव सभ्यता भाषाओँ और साहित्य के सृजन और विनाश की कहानी है। जिस काल में श्रेष्ठ साहित्य रचा गया वह स्वर्णयुग कहलाया जबकि जिस काल में साहित्य का ह्रास हुआ वह पतन काल हुआ। सनातन मूल्यों के संधान और अनुकरण हेतु सजग रहे भारत ने समय-समय पर विविध भाषाओँ का उत्थान और पतन ही नहीं देखा अपितु सुकाल में स्वयं विश्व को ज्ञान प्रदान और दुष्काल में ज्ञान को ग्रहण किया है। भारत में संस्कृत पाली, प्राकृत, अपभ्रंश, पैशाची, गोंडी, भीली, कोरकू, कौरवी, जैसी अगणित भाषाएँ विकसित हुईं। अधिकाँश काल के गाल में समां गयीं। वर्तमान में लगभग ५०० भाषाएँ-बोलियाँ व्यवहार में हैं। हिंदी भारत में जन्मी हुई नवीनतम भाषा है।
जन्म के साथ ही हिंदी को संस्कृत और अपभृंश की विरासत प्राप्त हुई। हिंदी की समकालिक उर्दू फ़ारसी-अरबी और सीमान्त प्रदेश की भाषाओँ के शब्दों का सम्मिश्रण मात्र होकर रह गयी किन्तु हिंदी ने २० से अधिक भाषाओँ और ५० से अधिक बोलिओं से शब्द संपदा, मुहावरे, लोकोक्तियाँ, तत्सम-तद्भव शब्द आदि ग्रहणकर खुद को समृद्ध किया। यह क्रिया केवल भारत तक सीमित नहीं रही अपितु पूरे विश्व से आदान-प्रदान हुआ। फलत: हिंदी आज विश्ववाणी बनने की रह पर दिन-ब-दिन आगे बढ़। हिंदी ने केवल शब्द ही ग्रहण नहीं किये अपितु सृजन विधाएँ भी ग्रहण कीं। गद्य में किस्सागोई, निबंध, रिपोर्ताज, यात्रावृत्त आदि तथा पद्य में विविध छंद ग्रहण करने में हिंदी को किंचित भी परहेज नहीं हुआ। फ़ारसी से रुबाई, नज़्म, ग़ज़ल आदि, अंग्रेजी से कप्लेट, सोनेट आदि तथा जापानी से हाइकु, ताँका, बाँका आदि को हिंदी ने केवल ग्रहण ही नहीं किया अपितु उनका भारतीयकरण कर अपने व्याकरण और भाषिक प्रवृत्ति अनुसार नया रूप भी दे दिया। फलत:, मूल भाषा की तुलना में हिंदी में उन छंदों के दो रूप मूल की तरह तथा भारतीय रूप विकसित होने लगे हैं। यह प्रवृत्ति हाइकु लेखन में सहज ही देखी जा सकती है। हिंदी में 'हाइकु चंद ध्वनियों का उपयोग कर एक छवि निखारना है' की पारम्परिक धारणा से हटकर मुक्तक, गीत, ग़ज़ल, समीक्षा, भूमिका और खंड काव्य का भी माध्यम बने हैं। यहाँ यह उल्लेख अप्रासंगिक न होगा कि संस्कृत से गायत्री, कुकुप आदि तथा पंजाबी से माहिया जैसे त्रिपदिक छंद हाइकु के पहले से ही हिंदी में रचे जाते रहे हैं।
हाइकु (Haiku 俳句 high-koo) ऐसी लघु कवितायेँ हैं जो एक अनुभूति या छवि को व्यक्त करने के लिए संवेदी भाषा प्रयोग करती हैं। हाइकु बहुधा प्रकृति के तत्व, सौंदर्य के पल या मार्मिक अनुभव से प्रेरित होते हैं। मूलतः जापानी कवियों द्वारा विकसित हाइकु काव्यविधा अंग्रेजी तथा अन्य भाषाओँ द्वारा ग्रहण की गयी। पाश्चात्य काव्य से भिन्न हाइकु में सामान्यतः तुकसाम्य, छंद बद्धता या काफ़िया नहीं होता। हाइकु को असमाप्त काव्य चूँकि हर हाइकु में पाठक / श्रोता के मनोभावों के अनुसार पूर्ण किये जाने की अपेक्षा होती है। हाइकु का उद्भव 'रेंगा नहीं हाइकाइ (haikai no renga) सहयोगी काव्य समूह' जिसमें शताधिक छंद होते हैं से हुआ है। 'रेंगा' समूह का प्रारंभिक छंद 'होक्कु' मौसम तथा अंतिम शब्द का संकेत करता है। हाइकु अपने काव्य-शिल्प से परंपरा के नैरन्तर्य बनाये रखता है। समकालिक हाइकुकार कम शब्दों से लघु काव्य रचनाएँ करते हैं. ३-५-३ सिलेबल (ध्वनिखंड या उच्चार) के लघु हाइकु भी रचे जाते हैं।
हाइकु का वैशिष्ट्य
१. ध्वन्यात्मक संरचना: पारम्परिक जापानी हाइकु १७ ध्वनियों का समुच्चय है जो ५-७-५ ध्वनियों की ३ पंक्तियों में विभक्त होते हैं। अंग्रेजी के कवि इन्हें सिलेबल (लघुतम उच्चरित ध्वनि, उच्चार) कहते हैं। समय के साथ विकसित हाइकु काव्य के अधिकांश हाइकुकार अब इस संरचना का अनुसरण नहीं करते। जापानी या अंग्रेजी के आधुनिक हाइकु न्यूनतम एक से लेकर सत्रह से अधिक ध्वनियों तक के होते हैं। अंग्रेजी सिलेबल लम्बाई में बहुत परिवर्तनशील होते हैं जबकि जापानी सिलेबल एकरूपेण लघु होते हैं। हाइकु लेखन में सिलेबल निर्धारण के लिये जापानी अवधारणा "हाइकु एक श्वास में अभिव्यक्त कर सके" उपयुक्त है। अंग्रेजी में सामान्यतः इसका आशय १० से १४ सिलेबल लंबी पद्य रचना से है। अमेरिकन उपन्यासकार जैक कैरोक का एक हाइकू देखें -
Snow in my shoe मेरे जूते में बर्फ
Abandoned परित्यक्त
Sparrow's nest गौरैया-नीड़
२. वैचारिक सन्निकटता: हाइकु में दो विचार सन्निकट हों: जापानी शब्द 'किरु' / 'किरेजी' (हिन्दी में विभाजक शब्द) का आशय है कि हाइकु में दो सन्निकट विचार हों जो व्याकरण की दृष्टि से स्वतंत्र तथा कल्पना प्रवणता की दृष्टि से भिन्न हों। सामान्यतः जापानी हाइकु 'किरेजी' (विभाजक शब्द) द्वारा विभक्त दो सन्निकट विचारों को समाहित कर एक सीधी पंक्ति में रचे जाते हैं। किरेजी एक ध्वनि पदावली (वाक्यांश) के अंत में आती है। अंग्रेजी में किरेजी की अभिव्यक्ति डैश '-' से की जाती है. बाशो के निम्न हाइकु में दो भिन्न विचारों की संलिप्तता देखें:
how cool / the feeling of a wall / against the feet — siesta
कितनी शीतल / दीवार की अनुभूति / पैर के सामने
आम तौर पर अंग्रेजी हाइकु ३ पंक्तियों में रचे जाते हैं। २ सन्निकट विचार (जिनके लिये २ पंक्तियाँ ही आवश्यक हैं) पंक्ति-भंग, विराम चिन्ह अथवा रिक्त स्थान द्वारा विभक्त किये जाते हैं। अमेरिकन कवि ली गर्गा का एक हाइकु देखें-
fresh scent- ताज़ा सुगंध
the lebrador's muzzle लेब्राडोर की थूथन
deepar into snow गहरे बर्फ में
"किरेजि" जापानी कविता में शब्द-संयम की आवश्यकता से उत्पन्न रूढ़ि-शब्द है जो अपने आप में किसी विशिष्ट अर्थ का द्योतक न होते हुए भी पद-पूर्ति में सहायक होकर कविता के सम्पूर्णार्थ में महत्त्वपूर्ण योगदान करता है। सोगि (१४२०-१५०२) के समय में १८ किरेजि निश्चित हो चुके थे। समय के साथ इनकी संख्या बढ़ती रही। महत्वपूर्ण किरेजि है- या, केरि, का ना, और जो। "या" कर्ता का अथवा अहा, अरे, अच्छा आदि का बोध कराता है।
यथा-
आरा उमि या / सादो नि योकोतोओ / आमा नो गावा [ "या" किरेजि]
अशांत सागर / सादो तक फैली है / नभ गंगा
३. विषय चयन और मार्मिकता: पारम्परिक हाइकु मनुष्य के परिवेश, पर्यावरण और प्रकृति पर केंद्रित होता है। हाइकु को ध्यान की एक विधि के रूप में देखें जो स्वानुभूतिमूलक व्यक्तिनिष्ठ विश्लेषण या निर्णय आरोपित किये बिना वास्तविक वस्तुपरक छवि को सम्प्रेषित करती है। जापानी कवि क्षणभंगुर प्राकृतिक छवियाँ यथा मेंढक का तालाब में कूदना, पत्ती पर जल वृष्टि होना, हवा से फूल का झुकना आदि को ग्रहण व सम्प्रेषित करने के लिये हाइकु का उपयोग करते हैं। कई कवि 'गिंकगो वाक' (नयी प्रेरणा की तलाश में टहलना) करते हैं। भारतीय हाइकु प्रकृति से परे हटकर शहरी वातावरण, भावनाओं, अनुभूतियों, संबंधों, उद्वेगों, आक्रोश, विरोध, आकांक्षा, हास्य आदि को हाइकु की विषयवस्तु बना रहे हैं।
४. मौसमी संदर्भ:
जापान में 'किगो' (मौसमी बदलाव, ऋतु परिवर्तन आदि) हाइकु का अनिवार्य तत्व है। मौसमी संदर्भ स्पष्ट या प्रत्यक्ष (सावन, फागुन आदि) अथवा सांकेतिक या परोक्ष (ऋतु विशेष में खिलने वाले फूल, मिलनेवाले फल, मनाये जाने वाले पर्व आदि) हो सकते हैं. फुकुडा चियो नी रचित हाइकु देखें:
morning glory! भोर की दमक
the well bucket-entangled, कूप - बाल्टी गठबंधन
I ask for water मैंने पानी माँगा
५. विषयांतर: हाइकु में दो सन्निकट विचारों की अनिवार्यता को देखते हुए चयनित विषय का परिदृश्य के २ भाग होते हैं। जैसे लकड़ी के लट्ठे पर रेंगती दीमक पर केंद्रित होते समय उस छवि को पूरे जंगल या दीमकों के निवास के साथ जोड़ें। सन्निकटता तथा संलिप्तता हाइकु को सपाट वर्णन के स्थान पर गहराई तथा लाक्षणिकता प्रदान करती हैं. रिचर्ड राइट का यह हाइकु देखें:
A broken signboard banging टूटा साइनबोर्ड तड़का
In the April wind. अप्रैल की हवाओं में
Whitecaps on the bay. खाड़ी में झागदार लहरें
इस पृष्ठभूमि में हिंदी की उदीयमान रचनाकार शशि पुरवार के हाइकु संकलन ''जोगिनी गंध'' को पढ़ने से पूर्व यह जान लें कि शशि जी जापानी ''उच्चार'' को हिंदी में ''वर्ण'' में बदल लेनेवाली पद्धति से हाइकु रचती हैं। शशि जी सुशिक्षित, संभ्रांत, शालीन व्यक्तित्व की धनी होने के साथ-साथ शब्द संपदा और अभिव्यक्ति सामर्थ्य की धनी हैं। वे जीवन और सृष्टि को खुली आँखों से देखते हुए चैतन्य मस्तिष्क से दृश्य का विवेचन कर हिंदी के त्रिपदिक वर्णिक छंद हाइकु की रचना ५-७-५ वर्ण संख्या को आधार बनाकर करती हैं। स्वलिखित भूमिका में शशि जी ने हाइकु की उद्भव और रचना प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कुछ हाइकुकारों के हाइकुओं का उल्लेख किया है। संभवत: अनावश्यक विस्तार भय से उन्होंने लगभग ३ दशक पूर्व से हिंदी में मेरे द्वारा रचित हाइकु मुक्तकों, ग़ज़लों, गीतों, समीक्षाओं आदि का उल्लेख नहीं किया तथापि स्वलिखित हाइकु गीत, हाइकु चोका गीत प्रस्तुत कर इस परंपरा को आगे बढ़ाया है।
'जोगिनी गंध' में शशि जी के हाइकु जोगनी गंध (प्रेम, मन, पीर, यादें/दीवानापन), प्रकृति (शीत, ग्रीष्म व फूल पत्ती-लताएं, पलाश, हरसिंगार, चंपा, सावन, रात-झील में चंदा, पहाड़, धूप सोनल, ठूँठ, जल, गंगा, पंछी, हाइगा), जीवन के रंग (जीवन यात्रा, तीखी हवाएँ, बंसती रंग, दही हांडी, गाँव, नंन्हे कदम-अल्डहपन, लिख्खे तूफान, कलम संगिनी) तथा विविधा (हिंद की रोली, अनेकता में एकता, ताज, दीपावली, राखी, नूतन वर्ष, हाइकु गीत, हाइकु चोका गीत, नेह की पाती, देव नहीं मैं, गौधुली बेला में, यह जीवन, रिश्तों में खास, तांका, सदोका, डाॅ. भगवती शरण अग्रवाल के मराठी में, मेरे द्वारा अनुवादित कुछ हाइकु) शीर्षकों-उपशीर्षकों में वर्गीकृत हैं। शशि जी ने प्रेम को अपने हाइकू में अभिनव दृष्टि से अंकित किया है - सूखें हैं फूल / किताबों में मिलती / प्रेम की धूल।
प्रेम की सुकोमल प्रतीति की अनुभूति और अभिव्यक्ति करने में शशि जी के नारी मन ने अनेक मनोरम शब्द-चित्र उकेरे हैं। एक झलक देखें -
छेड़ो न तार / रचती सरगम / हिय-झंकार।
तन्हा पलों में / चुपके से छेडती / यादें तुम्हारी।
शशि जी हाइकु रचना में केवल प्रकृति दृश्यों को नहीं उकेरतीं। वे कल्पना, आशा-आकांक्षा, सुख-दुःख आदि मानवीय अनुभूतियों को हाइकु का विषय बना पाती हैं-
सुख की धारा / रेत के पन्नों पर / पवन लिखे।
दुःख की धारा / अंकित पन्नों पर / जल में डूबी।
बनूँ कभी मैं / बहती जल धारा / प्यास बुझाऊँ।
हाइकु के शैल्पिक पक्ष की चर्चा करें तो शशि जी ने हिंदी छंदों की पदान्तता को हाइकू से जोड़ा है। कही पहली-दूसरी पंक्ति में तुक साम्य है, कहीं पहली तीसरी पंक्ति में, कहीं दूसरी-तीसरी पंक्ति में, कहीं तीनों पंक्तियों में किन्तु कहीं -कहीं तुकांत मुक्त हाइकु भी हैं-
प्यासा है मन / साहित्य की अगन / ज्ञान पिपासा।
दिल दीवाना / छलकाते नयन / प्रेम पैमाना।
अँधेरी रात / मन की उतरन / अकेलापन।
अनुगमन / कसैला हुआ मन / आत्मचिंतन।
तेरे आने की / हवा ने दी दस्तक / धडके दिल।
शशि जी के ये हाइकु प्रकृति और पर्यावरण से अभिन्न हैं। स्वाभाविक है कि इनमें प्रकृति के सौंदर्य का चित्रण हो।
स्नेह-बंधन / फूलों से महकते / हर सिंगार।
हरसिंगार / महकता जीवन / मन प्रसन्न।
पत्रों पे बैठे / बारिश के मनके / जड़ा है हीरा।
ले अंगडाई / बीजों से निकलते / नव पत्रक।
काली घटाएँ / सूरज को छुपाए / आँख मिचोली।
प्रकृति के विविध रूपों का हाइकुकरण करते समय बिम्बों, प्रतीकों और मानवीकरण करते समय कृत्रिमता अथवा पुनरावृत्ति का खतरा होता है। शशि के हाइकु इस दोष से मुक्त ही नहीं विविधता और मौलिकता से संपन्न भी हैं।
सिंधु गरजे / विध्वंश के निशान / अस्तित्व मिटा।
नभ ने भेजी / वसुंधरा को पाती / बूँदों ने बाँची।
राग-बैरागी / सुर गाए मल्हार / छिड़ी झंकार ।
धरा-अम्बर / तारों की चूनर का / सौम्य शृंगार।
हाइकू के माध्यम से नवाशा और नवाचार को स्पर्श करने का सफल प्रयास करती हैं शशि-
हौसले साथ / जब बढे़ कदम / छू लो आसमां ।
हरे भरे से / रचे नया संसार / धरा का स्नेह।
संग खेलते / ऊँचे होते पादप / छू ले आंसमा।
शशि का शब्द भंडार समृद्ध है। तत्सम-तद्भव शव्दों के साथ वे आवश्यक अंग्रेजी या अरबी शब्दों का सटीक प्रयोग करती हैं -
रूई सा फाहा / नजरो में समाया / उतरी मिस्ट।
जमता खून / हुई कठिन साँसे / फर्ज-इन्तिहाँ।
हिम-से जमे / हृदय के ज़ज़्बात / किससे कहूँ?
करूँ रास का काव्य से गहरा नाता है। कविता का उत्स मिथुनरत क्रौंच युगल के नर का बहेलिया द्वारा वध करने पर क्रौंची के चीत्कार को सुनकर आदिकवि वाल्मीकि के मुख से नि:सृत श्लोक से हुआ है। शशि के हाइकु करुण रस से भी संपृक्त हैं।
उड़ता पंछी / पिंजरे में जकड़ा / है परकटा।
दरख्तों को / जड़ से उखडती / तूफानी हवा।
शशि परंपरा का अनुकरण ही करतीं, आवश्यकता होने पर उसे तोड़ती भी हैं। उन्होंने ६-७-५ वर्ण लेकर भी हाइकु लिखा है -
शूलों-सी चुभन / दर्द भरा जीवन / मौन रुदन।
हाइकु के लघु कलेवर में मनोभावों को शब्दित कर पाना आसान नहीं होता। शशि ने इस चुनौती को स्वीकार कर मनोभाव केंद्रित हाइकु रचे हैं -
अवचेतन / लोलुपता की प्यास / ठूँठ बदन।
सूखी पत्तियाँ / बेजार होता तन / अंतिम क्षण।
वर्तमान समय का संकट सबसे बड़ा पर्यावरण का असंतुलन है। शशि का हाइकुकार इस संकट से जूझने के लिए सन्नद्ध है-
कम्पित धरा / विषैली पोलिथिन / मानवी भूल।
जगजननी / धरती की पुकार / वृक्षारोपण।
पर्वत पुत्री / धरती पे जा बसी / सलोना गाँव।
मानुष काटे / धरा का हर अंग / मिटते गाँव।
केदारनाथ / बेबस जगन्नाथ / वन हैं कटे।
सामाजिक टकराव और पारिवारिक बिखराव भी चिंता का अंग हैं -
बेहाल प्रजा / खुशहाल है नेता / खूब घोटाले।
चिंता का नाग / फन जब फैलाये / नष्ट जीवन।
पति-पत्नी में / वार्तालाप सीमित / अटूट रिश्ता।
जोगिनी गंध में नागर और ग्रामीण, वैयक्तिक और सामूहिक, सांसारिक और आध्यात्मिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक अर्थात परस्पर विरोध और भिन्न पहलुओं को समेटा गया है। गागर में सागर की तरह शशि का हाइकुकार त्रिपदियों और सत्रह वर्णों में अकथनीय भी कह सका है। प्रथम हाइकु संग्रह अगले संकलनों के प्रतिउत्सुकता जाग्रत करता है। पाठकों को यह संकलन निश्चय भायेगा और ख्याति दिलाएगा।
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संपर्क - विश्ववाणी हिंदी संस्थान, ४०१ अपार्टमेंट, नेपियर टाउन, जबलपुर ४८२००१,
चलभाष - ७९९९५५९६१८, ईमेल - salil.sanjiv@gmail.com
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साँसे x - सांसें, ख्वावों x -ख्वाबों, सांवरिया x - साँवरिया, उष्णता x - ऊष्णता, तर्फ x इसकी जगह ओर , इन्तिहाँ x - इंतिहा, प्रदुषण x - प्रदूषण,
सुझाव
धोखा पाकर / पहाड़ जैसी बनी / नाजुक कन्या। 'पहाड़' के स्थान पर 'कटार' पर विचार करें।

लघुकथा बर्दाश्तगी

लघुकथा
बर्दाश्तगी
*
एक शायर मित्र ने आग्रह किया कि मैं उनके द्वारा संपादित किये जा रहे हम्द (उर्दू काव्य-विधा जिसमें परमेश्वर की प्रशंसा में की गयी कवितायेँ) संकलन के लिये कुछ रचनाएँ लिख दूँ, साथ ही जिज्ञासा भी की कि इसमें मुझे, मेरे धर्म या मेरे धर्मगुरु को आपत्ति तो न होगी? मैंने तत्काल सहमति देते हुए कहा कि यह तो मेरे लिए ख़ुशी का वायस (कारण) है।
कुछ दिन बाद मित्र आये तो मैंने लिखे हुए हम्द सुनाये, उन्होंने प्रशंसा की और ले गये।
कई दिन यूँ ही बीत गये, कोई सूचना न मिली तो मैंने समाचार पूछा, उत्तर मिला वे सकुशल हैं पर किताब के बारे में मिलने पर बताएँगे। एक दिन वे आये कुछ सँकुचाते हुए। मैंने कारण पूछा तो बताया कि उन्हें मना कर दिया गया है कि अल्लाह के अलावा किसी और की तारीफ में हम्द नहीं कहा जा सकता जबकि मैंने अल्लाह के साथ- साथ चित्रगुप्त जी, शिव जी, विष्णु जी, ईसा मसीह, गुरु नानक, दुर्गा जी, सरस्वती जी, लक्ष्मी जी, गणेश जी व भारत माता पर भी हम्द लिख दिये थे। कोई बात नहीं, आप केवल अल्लाह पर लिख हम्द ले लें। उन्होंने बताया कि किसी गैरमुस्लिम द्वारा अल्लाह पर लिख गया हम्द भी क़ुबूल नहीं किया गया।
किताब तो आप अपने पैसों से छपा रहे हैं फिर औरों का मश्वरा मानें या न मानें यह तो आपके इख़्तियार में है -मैंने पूछा।
नहीं, अगर उनकी बात नहीं मानूँगा तो मेरे खिलाफ फतवा जारी कर हुक्का-पानी बंद दिया जाएगा। कोई मेरे बच्चों से शादी नहीं करेगा -वे चिंताग्रस्त थे।
अरे भाई! फ़िक्र मत करें, मेरे लिखे हुए हम्द लौटा दें, मैं कहीं और उपयोग कर लूँगा। मैंने उन्हें राहत देने के लिए कहा।
उन्हें तो कुफ्र कहते हुए ज़ब्त कर लिया गया। आपकी वज़ह से मैं भी मुश्किल में पड़ गया -वे बोले।
कैसी बात करते हैं? मैं आप के घर तो गया नहीं था, आपकी गुजारिश पर ही मैंने लिखे, आपको ठीक न लगते तो तुरंत वापिस कर देते। आपके यहां के अंदरूनी हालात से मुझे क्या लेना-देना? मुझे थोड़ा गरम होते देख वे जाते-जाते फिकरा कस गये 'आप लोगों के साथ यही मुश्किल है, बर्दाश्तगी का माद्दा ही नहीं है।'

***

शुक्रवार, 26 नवंबर 2021

लघुकथा नैवेद्य

लघुकथा
नैवेद्य
*
- प्रभु! मैं तुम सबका सेवक हूँ। तुम सब मेरे आराध्य हो। मुझे आलीशान महल दो। ऊँचा वेतन, निशुल्क भोजन, भत्ते, गाड़ी, मुफ्त इलाज का व्यवस्था कर दो ताकि तुम्हारी सेवा-पूजा कर सकूँ। बच्चे ने प्रार्थना की।
= प्रभु की पूजा तो उनको सुमिरन से होती है। इन सुविधाओं की क्या जरूरत है?
- जरूरत है, प्रभु त्रिलोक के स्वामी हैं। उन्हें छप्पन भोग अर्पण तभी कर सकूँगा जब यह सब होगा।
= प्रभु भोग नहीं भाव के भूखे होते हैं।
- फिर भाव अर्पित करनेवालों को अभाव में क्यों रखते हैं?
= वह तो उनकी करनी का फल है।
- इसीलिये तो, प्रभु से माँगना गलत कैसे हो सकता है? फिर जो माँगा उन्हीं के लिए
= लेकिन यह गलत है। ऐसा कोई नहीं करता ।
- क्यों नहीं करता? किसान का कर्जा उतारने के लिए एक दल से दूसरे दल में जाकर सरकार बनाने की जनसेवा हो सकती है तो प्रभु से माँगकर प्रभु की जन सेवा क्यों नहीं हो सकती?
मंदिर में दो बच्चों की वार्ता सुनकर स्तब्ध थे प्रभु लेकिन पुजारी प्रभु को दिखाकर ग्रहण कर रहा था नैवेद्य।
***
संजीव
७९९९५५९६१८
२६-११-२०१९

नवगीत

नवगीत :
नीले-नीले कैनवास पर
बादल-कलम पकड़ कर कोई
आकृति अगिन बना देता है
*
मोह रही मन द्युति की चमकन
डरा रहा मेघों का गर्जन
सांय-सांय-सन पवन प्रवाहित
जल बूँदों का मोहक नर्तन
लहर-लहर लहराता कोई
धूसर-धूसर कैनवास पर
प्रवहित भँवर बना देता है
*
अमल विमल निर्मल तुहिना कण
हरित-भरित नन्हे दूर्वा तृण
खिल-खिल हँसते सुमन सुवासित
मधुकर का मादक प्रिय गुंजन
अनहद नाद सुनाता कोई
ढाई आखर कैनवास पर
मन्नत कफ़न बना देता है
***

एक रचना :
*
अपने मुँह
अपना यश-गान।
*
अब भी हैं
धृतराष्ट्र धरा पर
आत्म-मोह से ग्रस्त।
जाते जिसके निकट
उसी को
करते हैं संत्रस्त।
अहंकार के
मारे को हो
कैसे सुख-संतोष?
देख न निज के दोष
दूसरों को
देते हैं दोष।
जनगण-जनमत
को ठुकराते
कर-पाते अपमान
अपने मुँह
अपना यश-गान।
*
आधा देखें,
आधा लेखें,
मुँह-देखी बोलें।
विष-रस भरा
कनक-घट दिखता
जब भी मुँह खोलें।
परख रहे
औरों की कृतियाँ,
छिपा रहे हैं
खुद की त्रुटियाँ।
माइक पकड़ें
जमकर जकड़ें
मन माना बोलें।
सीख सयानों की
बिसरादी
बात तनिक तोलें।
क्षमा न करता
समय, कुयश का
कोई नहीं निदान
******
नवगीत :
*
आत्म मोह से
रहे ग्रस्त जो
उनकी कलम उगलती विष है
करें अनर्थ
अर्थ का पल-पल
पर निन्दाकर
हँस सोते हैं
*
खुद को
कहते रहे मसीहा
औरों का
अवदान न मानें
जिसने गले लगाया उस पर
कीच डालने का हठ ठानें
खुद को नहीं
तोलते हैं जो
हल्कापन ही
जिनकी फितरत
खोल न पाते
मन की गाँठें
जो पाया आदर खोते हैं
*
मनमानी
व्याख्याएँ करते
लिखें उद्धरण
नकली-झूठे
पढ़ पाठक, सच समझ
नहीं क्यों
ऐसे लेखक ऊपर थूके?
सबसे अधिक
बोलते हैं वे
फिर भी शिकवा
बोल न पाए
ऐसे वक्ता
अपनी गरिमा खो
जब भी मिलते रोते हैं
***
सामयिक नवगीत
*
नाग, साँप, बिच्छू भय ठाँड़े,
धर संतन खों भेस।
*
हात जोर रय, कान पकर रय,
वादे-दावे खूब।
बिजयी हो झट कै दें जुमला,
मरें नें चुल्लू डूब।।
की को चुनें, नें कौनउ काबिल,
कपटी, नकली भेस।
*
सींग मार रय, लात चला रय,
फुँफकारें बिसदंत।
डाकू तस्कर चोर बता रय,
खुद खें संत-महंत।
भारत मैया हाय! नोच रइ
इनैं हेर निज केस।
*
जे झूठे, बे लबरा पक्के,
बाकी लुच्चे-चोर।
आपन माँ बन रय रे मिट्ठू,
देख ठठा रय ढोर।
टी वी पे गरिया रय
भत्ते बढ़वा, सरम नें सेस।
*
संजीव,
२६-११-२०१८
नवगीत 
*
जै जै बोलो
संविधान की
फिर बाँधो ठठरी
*
दीन-हीन जन के प्रतिनिधि बन मतदाता का चूसो खून।
मौज करो सरकारी धन पर
कहो पाँच होते दो दून।
स्वार्थों की मैदा
लालच का तेल
तलो मठरी
*
आदर्शों की कर नीलामी बेच-खरीदो खुल्लेआम।
नियम-कायदे तोड़-मरोड़ो बढ़ा-चढ़ाकर माँगो दाम।
मुँह काला हो
तो क्या चिंता
लाद मोह-गठरी
*
जनता मरती तो मरने दो, जाये भाड़ में देश।
बनो बेहया भाषण झाड़ो शर्म न करना लेश।
नीरो बनकर
बजा बाँसुरी
पुलिस चला लठरी
***
संजीव
२६-११-२०१९
७९९९५५९६१८
एक रचना:
चढ़ा, बैठ फिर उतर रहा है
ये पहचाना,
वो अनजाना
दुनिया एक मुसाफिर खाना
*
साँसों का कर सफर मौन रह
औरों की सुन फिर अपनी कह
हाथ आस का छोड़ नहीं, गह
मत बन गैरों का दीवाना
दुनिया एक मुसाफिर खाना
*
जो न काम का उसे बाँट दे
कोई रोके डपट-डाँट दे
कंटक पथ से बीन-छाँट दे
बन मधुकर कुछ गीत सुनाना
दुनिया एक मुसाफिर खाना
*
कौन न माँगे? सब फकीर हैं
केवल वे ही कुछ अमीर हैं
जिनके मन रमते कबीर हैं
ज्यों की त्यों चादर धर जाना
दुनिया एक मुसाफिर खाना
*
गैर आज, कल वही सगा है
रिश्ता वह जो नेह पगा है
साये से ही पायी दगा है
नाता मन से 'सलिल' निभाना
दुनिया एक मुसाफिर खाना
*

मुक्तक, दोहा

मुक्तक:
मेरी तो अनुभूति यही है शब्द ब्रम्ह लिखवा लेता
निराकार साकार प्रेरणा बनकर कुछ कहला लेता
मात्र उपकरण मानव भ्रमवश खुद को रचनाकार कहे
दावानल में जैसे पत्ता खुद को करता मान दहे
*
बात न करने को कुछ हो तो कहिये कैसे बात करें?
बिना बात के बात करें जो नाहक शह या मात करें
चोट न जो सह पाते देते पड़ती तो रो देते हैं-
दोष विधाता को दे कहते विधना क्यों आघात करे??
*
दोहा सलिला
राम आत्म परमात्म भी, राम अनादि-अनंत
चित्र गुप्त है राम का, राम सृष्टि के कंत
*
विधि-हरि-हर श्री राम हैं, राम अनाहद नाद
शब्दाक्षर लय-ताल हैं, राम भाव रस स्वाद
*
राम नाम गुणगान से, मन होता है शांत
राम-दास बन जा 'सलिल', माया करे न भ्रांत
*


गुरुवार, 25 नवंबर 2021

विवाह गीत

हिंदी चित्रपट से विवाह गीत 
*
जब तक पूरे न हों फेरे सात
तब तक दुल्हिन नहीं दुल्हा की
तब तक बबुनी नहीं बबुआ की

अबही तो बबुआ पहली भँवर पड़ी है
अभी तो पहुना दिल्ली दूर खड़ी है
पहली भँवर पड़ी है,दिल्ली दूर खड़ी है
करनी होगी तपस्या सारी रात
सात फेरे सात जन्मों का साथ...

जैसे जैसे भँवर पड़े मन अंगना को छोड़े
एक एक भाँवर नाता अन्जानों से जोड़े
घर अंगना को छोड़े, नाता अन्जानों से जोड़े
सुख की बदरी आंसू की बरसात
सात फेरे सात जन्मों का साथ...

सात फेरे धरो बबुआ भरो सात वचन जी
ऐसे कन्या कैसे अर्पण कर दे तन भी मन भी
उठो उठो बबुनी देखो ध्रुव तारा
ध्रुव तारे सा हो अमर सुहाग तिहारा
ओ देखो देखो ध्रुव तारा, अमर सुहाग तिहारा
सातों फेरे सातों जन्मों का साथ...
***
अमीर से होती हैं, गरीब से होती हैं
दूर से होती हैं, क़रीब से होती हैं
मगर जहाँ भी होती हैं, ऐ मेरे दोस्त
शादियाँ तो नसीब से होती हैं

आज मेरे यार की शादी है
यार की शादी है, मेरे दिलदार की शादी है
लगता है जैसे सारे संसार की शादी है
आज मेरे यार की शादी है...

वक़्त है खूबसूरत, बड़ा शुभ लगन मुहूरत
देखो क्या खूब सजी है, दुल्हे की भोली सूरत
ख़ुशी से झूमे है मन, मिला सजनी को साजन
कैसे संजोग मिले हैं, चोली से बँध गया दामन
एक मासूम कली से मेरे गुलज़ार की शादी है
आज मेरे यार की शादी है...

ओ सुन मरे दिल जानी, तेरी भी ये जवानी
शुरु अब होने लगी है, नयी तेरी जिंदगानी
ख़ुशी से क्यों इतराए, आज तू हमें नचाये
वक़्त वो आने वाला, दुल्हनिया तुझे नचाये
किसी के सपनों के सोलह-सिंगार की शादी है
आज मेरे यार की शादी है...

सारे तारे तोड़ लाऊँ, तेरे सेहरे को सजाऊँ
फूल राहों में बिछाऊ…
***
मेरी बन्नो की आएगी बारात, कि ढोल बजाओ जी
मेरी लाडो की आएगी बारात, कि ढोल बजाओ जी
आज नाचूंगी मैं सारी रात, कि ढोल बजाओ जी
मेरी बन्नो की आएगी बारात ...

सजना के घर तू जाएगी, याद हमें तेरी आएगी
जा के पिया के देस में ना, हमको भुलाना
आँख बाबुल तेरी क्यों भर आई
बेटीयाँ तो होती हैं पराई,
अब रहेगी ये सइयां जी के साथ, कि ढोल बजाओ जी,
मेरी बन्नो की आएगी बारात ...

गज़रा खिला है बालों पे, सुर्खी लगी है गालों पे
बिंदिया चमकती है माथे पे, नैनों में कज़रा
सज़ा है तन पे, गहना
लगे क्या खूब तू, बहना
खिली होठों पे, लाली
सजे कानों में, बाली
लगी मेंहदी दुल्हनिया के हाथ, कि ढोल बजाओ जी
मेरी बन्नो की आएगी बारात ...

ले लूँ बलाएं तेरी सभी, दे दूँ तुझे मैं अपनी खुशी
माँग दुआ मैं रब से यही, तू खुश रहे,
कोई चाहत रहे ना अधूरी
तेरी सारी तमन्ना हो पूरी
मैंने कहदी मेरे दिल की बात
मेरी बन्नो की आएगी बारात ..
***
बाबुल जो तुमने सिखाया, जो तुमसे पाया
सजन घर ले चली, सजन घर मैं चली

यादों के लेकर साये, चली घर पराये, तुम्हारी लाड़ली
कैसे भूल पाऊँगी मैं बाबा, सुनी जो तुमसे कहानियाँ
छोड़ चली आँगन में मइया, बचपन की निशानियाँ
सुन मेरी प्यारी बहना, सजाये रहना, ये बाबुल की गली
सजन घर मैं चली ...

बन गया परदेस घर जन्म का, मिली है दुनिया मुझे नयी
नाम जो पिया से मैं ने जोड़ा, नये रिश्तों से बँध गयी
मेरे ससुर जी पिता हैं, पति देवता हैं, देवर छवि कृष्ण की
सजन घर मैं चली ...
***
छोटे छोटे भाइयों के बड़े भैया, आज बनेंगे किसी के सैंया
ढोल नगाड़े बजे शहनाइयां, झूम के आईं मंगल घड़ियां
छोटे छोटे भाइयों ...

भाभी के संग होली में, रंग गुलाल उड़ाएंगे
आएगी जब जब दीवाली, मिलकर दीप जलाएंगे
चुनरी की कर देगी छैया, आएगी बन के पुरवइया
छोटे छोटे भाइयों ...

झिलमिल हो गई हैं अखियाँ, याद आईं बचपन की घड़ियां
नए सफ़र में लग जाएंगी, प्यार की इनको हथकड़ियां
जचते हैं देखो कैसे बड़े भैया, राम जी ब्याहने चले सीता मैया
छोटे छोटे भाइयों ...
***
चलें हैं बाराती बन ठन के
खुशियों से घुंघरू भी खनके
लेके जायेंगे दुल्हन, पूरा करेंगे वचन
डर डर के नहीं रे, तन तन के

अरे देखो देखो यार मेरा दूल्हा बना है
सर पे उमंगों का सेहरा बंधा है
मस्तियों का जाने कैसा जादू चला है
बिन पिए देखो नशा चढ़ने लगा है
होके घोड़ी पे सवार, बड़ा जचता है यार
सब नाचते हैं यार, बचपन के
चलें हैं बाराती बन ठन के...
***
घोड़ी पे हो के सवार चला है दूल्हा यार
कमरिया में बाँधे तलवार
अकड़ता है छैला मिली है ऐसी लैला
कि जोड़ी है नहले पे दहला
घोड़ी पे हो के ...

कल तक बेचारा हम सा कँवारा
फिरता था गली-गली मारा-मारा
देखी एक छोकरी फूलों की टोकरी
बोला दिल थाम के मैं हारा-हारा
यार को मुबारक हो मुहब्बत की बाज़ी
मियाँ बीवी राज़ी तो क्या करेगा काज़ी
सदा फूले-फले दोनों का प्यार
घोड़ी पे हो के ...

दुल्हन की धुन है कैसा मगन है
होगा मिलन देखो अभी-अभी
शादी की मस्ती लगती है सस्ती
पड़ती है महँगी भी कभी-कभी
ये बात मत भूलना प्यार की बहारें
नन्हें-मुन्नों की लगा देंगी क़तारें
तब उतरेगा जा के ख़ुमार
घोड़ी पे हो के ...
***
 ढोलक में ताल है, पायल में छन छन
घूंघट में गोरी है, सेहरे में साजन
जहाँ भी ये जाएँ, बहारें ही छाएँ
ये खुशियाँ ही पाएँ, मेरे दिल ने दुआ दी है
मेरे यार की शादी है...

प्यार मिला प्रीत मिली, मेरे यार को
बड़ी प्यारी जीत मिली, मेरे यार को
खुश है जो दिल, मैंने महफ़िल, गीतों से सजा दी है
मेरे यार की शादी ...

हार नहीं जीत नहीं जहाँ प्यार है
जिसमें हार जीत हो वो कहाँ प्यार है
लग जा गले, यार मेरे, मैंने दिल से सदा दी है
मेरे यार की शादी ...

साथी, सखियां, बचपन का ये अंगना
गुड़िया, झूले, कोई भी तो होगा संग ना
छुपाऊँगी आँसू कैसे, भीगेंगे कंगना

साथी सुन ले, बोले जो ये अंगना
ये मन, जीवन, प्यार के ही, रंग में रंगना
हँस देगी तेरी चूड़ी, खनकेंगे कंगना
साथी सुन ले रे
मेरे यार की शादी ...
***
 बाबुल की दुआएं लेती जा
जा तुझको सुखी संसार मिले
मैके की कभी ना याद आए
ससुराल में इतना प्यार मिले
बाबुल की दुआएं ...

नाज़ों से तुझे पाला मैंने
कलियों की तरह फूलों की तरह
बचपन में झुलाया है तुझको
बाँहों ने मेरी झूलों की तरह
मेरे बाग़ की ऐ नाज़ुक डाली
तुझे हर पल नई बहार मिले
बाबुल की दुआएं ...

जिस घर से बँधे हैं भाग तेरे
उस घर में सदा तेरा राज रहे
होंठों पे हँसी की धूप खिले
माथे पे ख़ुशी का ताज रहे
कभी जिसकी जोत न हो फीकी
तुझे ऐसा रूप-सिंगार मिले
बाबुल की दुआएं ...

बीतें तेरे जीवन की घड़ियाँ
आराम की ठंडी छाँवों में
काँटा भी न चुभने पाए कभी
मेरी लाड़ली तेरे पाँवों में
उस द्वार से भी दुख दूर रहें
जिस द्वार से तेरा द्वार मिले
बाबुल की दुआएं ...
***
मेरी प्यारी बहनिया बनेगी दुल्हनिया
सजके आएँगे दूल्हे राजा
भैया राजा बजाएगा बाजा

अपने पसीने को मोती कर दूँगा
मोतियों से बहना की माँग भर दूँगा
आएगी बारात देखेगी सारी दुनिया
होंगे लाखों में एक दूल्हे राजा
भैया राजा ...

सोलह सिंगार मेरी बहिना करेगी
टीका चढ़ेगा और हलदी लगेगी
बहना के होंठों पे झूलेगी नथनिया
और झूमेंगे दूल्हे राजा
भैया राजा ...

सेज पे बैठेगी वो डोली पे चढ़ेगी
धरती पे बहना रानी पाँव न धरेगी
पलकों की पालकी में बहना को बिठा के
ले जाएँगे दूल्हे राजा
भैया राजा ...

सजना के घर चली जाएगी जो बहना
होंठ हँसेंगे मेरे रोएँगे ये नैना
रखिया के रोज़ रानी बहना को बुलाऊँगा
ले के आएँगे दूल्हे राजा
भैया राजा ...
***
कब से आए हैं तेरे दूल्हे राजा
अब देर न कर जल्दी आजा

तेरे घर आया मैं आया तुझको लेने
दिल के बदले में दिल का नज़राना देने
मेरी हर धड़कन क्या बोले है सुन सुन सुन
साजन जी घर आए साजन जी घर आए
दुल्हन क्यूं शरमाए साजन जी घर आए

ऐ दिल चलेगा अब ना कोई बहाना
गोरी को होगा अब साजन के घर जाना
माथे की बिंदिया क्या बोले है सुन सुन सुन
साजन जी घर आए ...

दीवाने की चाल में फंस गई मैं इस जाल में
ऐ सखियों कैसे बोलो बोलो
मुझपे तो ऐ दिलरुबा तेरी सखियां भी फ़िदा
ये बोलेंगी क्या पूछो पूछो
जा रे जा झूठे तारीफ़ें क्यूं लूटे
तेरा मस्ताना क्या बोले है सुन सुन सुन
साजन जी घर आए ...

ना समझे नादान है ये मेरा एहसान है
चाहा जो इसको कह दो कह दो
छेड़ो मुझको जान के बदले में एहसान के
दे दिया दिल इसको कह दो कह दो
तू ये ना जाने दिल टूटे भी दीवाने
तेरा दीवाना क्या बोले है सुन सुन सुन
साजन जी घर …
***
दूल्हे की सालियों ओ हरे दुपट्टे वालियों \- २
जूते दे दो पैसे लेलो
को: जूते दे दो पैसे ले लो

दुल्हन के देवर तुम दिखलाओ ना ये तेवर \- २
पैसे देदो जूते लेलो
को: पैसे दे दो जूते ले लो

हे हे हे हे

अजी नोट गिनो जी, जूते लाओ
जिद छोड़ो जी, जूते लाओ
फ्रॉड हैं क्या हम, तुम ही जानो
अकड़ू हो तुम, जो भी मानो
को: जो भी मानो, जो भी मानो
अजी बात बढ़ेगी, बढ़ जाने दो
माँग चढ़ेगी, चढ़ जाने दो
पड़ो ना ऐसे, पहले जूते
को: पहले जूते पहले जूते
जूते लिये हैं नहीं चुराया कोई जेवर
दुल्हन के देवर तुम दिखलाओ ना ये तेवर
पैसे दे दो जूते ले लो
जूते दे दो पैसे ले लो \- २

कुछ ठँडा पी लो, मूड नहीं है
दही बड़े लो, मूड नहीं है
कुल्फ़ी खा लो, बहुत खा चुके
पान खा लो, बहुत खा चुके
को: बहुत खा चुके बहुत खा चुके
अजी रसमलाई, आपके लिये
इतनी मिठाई, आपके लिये
पहले जूते, खाएँगे क्या
आपकी मर्जी, नाजी …
***
ला ला ...
दीदी तेरा देवर दिवाना
दीदी तेरा देवर दिवाना
हाय राम कुड़ियों को डाले दाना
हाय राम कुड़ियों को डाले दाना

(धंधा है ये उसका पुराना)\- २
हाय राम कुड़ियों को डाले दाना
हाय राम कुड़ियों को डाले दाना

ल ल्ला ...

मैं बोली के लाना यू इमली का दाना
मगर वो छुहारे ले आया दिवाना
मैं बोली मचले है दिल मेरा हाय
वो खरबुजा लाया जो नीम्बू मँगाये
(पगला है कोई उसको बताना) \- २
हाय राम कुड़ियों को डाले दाना

हाय राम कुड़ियों को डाले दाना

ओय होए होए
दीदी तेरा देवर दिवाना
हाय राम कुड़ियों को डाले दाना

मैं बोली कि लाना तू मिट्टी का हाँड़ी
मगर वो बताशे ले आया अनाड़ी
मैं बोली के लादे मुझे तू खटाई
वो बाज़ार से लेके आया मिठाई
हूँ मुश्किल है यूं मुझको फँसाना \- २
हाय राम कुड़ियों को डाले दाना
हाय राम कुड़ियों को डाले दाना

उई माँ
दीदी तेरा देवर दिवाना
हाय राम कुड़ियों को डाल…
***
वाह वाह राम जी, जोड़ी क्या बनाई
भैय्या और भाभी को, बधाई हो बधाई
सब रसमों से बड़ी है जग में
दिल से दिल की सगाई

आपकी कृपा से ये, शुभ घड़ी आई
जीजी और जीजा को, बधाई हो बधाई
सब रसमों से बड़ी है जग में
दिल से दिल की सगाई

वाह वाह राम जी

मेरे भैय्या जो, चुप बैठे हैं
देखो भाभी ये, कैसे ऐंठे हैं
ऐसे बड़े ही भले हैं
माना थोड़े मन्चले हैं
पार आप के सिवा कहीं भी न फिसले हैं

देखो देखो ख़ुद पे, जीजी इतराई
भैय्या और भाभी को, बधाई हो बधाई
सब रसमों से बड़ी है

वाह वाह राम जी

सुनो जीजाजी, अजी आप के लिये
मेरी जीजी ने, बड़े तप हैं किये
मन्दिरों में किये फेरे
पूजा साँझ सवेरे
तीन लोक तैंतीस देवों के ये रही घेरे

जैसे मैं ने माँगी थी, वैसी भाभी पाई
जीजी और जीजा को, बधाई हो बधाई
सब रसमों से बड़ी है

वाह वाह राम जी
***
आज हमारे दिल में अजब ये उलझन है
गाने बैठे गाना, सामने समधन है
हम कुछ आज सुनायें, ये उनका भी मन है
गाने बैठे गाना, सामने समधन है

कानो की बालियाँ, चाँद सूरज लगे
ये बनारस की साड़ी खूब सजे
राज़ की बात बतायें, समधीजी घायल हैं
आज भी जब समधन की, खनकती पायल है

होंठों की ये हँसी, आँखों की ये हया
इतनी मासूम तो, होती है बस दुआ
राज़ की बात बतायें समधी खुश क़िसमत है.ब
लक्ष्मी है समधन जी, जिनसे घर जन्नत है

आज हमारे दिल में अजब ये उलझन है
सामने समधीजी, गा रही समधन है
हमको जो है निभाना, वो नाज़ुक बन्धन है
सामने समधीजी, गा रही समधन है

मेरी छाया है जो, आपके घर चली
सपना बन के मेरी, पलकों में है पली
राज़ की बात बतायें, ये पूँजी जीवन की
शोभा आज से है ये, आपके आँगन की
***
लो चली मैं अपनी देवर की बारात ले के लो चली मैं
न बैण्ड बजा, न ही बाराती, खुशियों की सौगात ले के
लो चली मैं

देवर दुल्हा बना, सर पे सेहरा सजा
भाभी बढ़कर आज बलाइयाँ लेती है
प्रेम की कलियाँ खिले, पल पल खुशियाँ मिले
सच्चे मन से आज दुआएँ देती है
घोड़े पे चढ़ के, चला है बाँका, अपनी दुल्हन से मिलने
लो चली मैं

वाह! वाह! राम जी, जोड़ी क्या बनाई
देवर देवरानीजी, बधाई हो बधाई
सब रसमों से बड़ी है जग में दिल से दिल की सगाई

आज है शुभ घड़ी, आज बनी मैं बड़ी
कल तक घर की बहु थी, अब हूँ जेठानी
हुक़ुम चलाऊँगी मैं, आँख दिखाऊँगी मैं
सहमी खड़ी रहेगी मेरी देवरानी
हज़ार सपने, पलकों में अपने दीवानी मैं साथ ले के
लो चली मैं .
***
कहे तोसे सजना,ये तोहरी सजनिया
पग पग लिए जाऊं, तोहरी बलैयां मैं
पग पग लिए जाऊं, तोहरी बलैयां

मगन अपनी धुन में रहे मोरा सैयां
पग पग लिए जाऊं,तोहरी बलैयां
पग पग लिए जाऊं,तोहरी बलैयां

बदरिया सी बरसूँ, घटा बन के छाऊँ
बदरिया सी बरसूँ
हो, बदरिया सी बरसूँ, घटा बन के छाऊँ
जिया तो ये चाहे, तोहे अंग लगाऊं

लाज निगोड़ी मोरी , रोके है पैयां
पग पग लिए जाऊं,तोहरी बलैयां, मैं
पग पग लिए जाऊं,तोहरी बलैयां
मैं जग की कोई रीत ना जानूं,
मैं जग की कोई
हो, मैं जग की कोई रीत ना जानूं
मांग का तोहे सिन्दूर मानूं
तू ही चूडियाँ मोरी, तू ही कलियाँ
पग पग लिए जाऊं,तोहरी बलैयां, मैं
पग पग लिए जाऊं,तोहरी बलैयां

मोहे लागे प्यारे, सभी रंग तिहारे
मोहे लागे प्यारे
हो, मोहे लागे प्यारे, सभी रंग तिहारे
दुःख सुख में हर पल, रहूँ संग पिया रे
दरदवा को बांटे, उमर लरकैयां
हो हो, पग पग लिए जाऊँ, तोहरी बलैयां
कहे तोहसे सजना, यह तोहरी सजनिया
पग पग लिए जाऊँ, तोहरी बलैयां
***

सगाई और संगीत के गीत –  

आज है सगाई सुन लड़की के भाई
कहती है मंगनी की अंगूठी प्रीत निभाना राजा जी
मेरी बन्नो की आएगी बारात
छलका छलका रे कलसी का पानी
बन्नो तेरी अखियां सुरमेदानी
बन्नो की सहेली रेशम की डोरी
दूल्हे का सालियों ओ हरे दुपट्टे वालियों
वाह वाह राम जी जोड़ी क्या बनाई
तुझको बना कर के ले जायेंगे बद्री की दुल्हनिया
छोटे छोटे भाइयों के बड़े भैया
मेहंदी और हल्दी के गीत –  
मेहंदी लगा के रखना डोली सजा के रखना
मेहंदी है रचने वाली
मेहंदी तो मेंहदी है रंग लाएगी
मेहंदी लगा के आई बिंदिया सजा के आई
मेहंदी लगाउंगी में सजना के नाम की
मेहंदी लगाऊं किसके नाम की
दीदी तेरा देवर दीवाना
लिख के मेहंदी से सजना का नाम
सच कहते हैं हम कसम से
बोले चूड़ियां बोले कंगना, हाय मैं हो गया तेरा साजना
बारात और शादी के गीत हिंदी में –  
लन्दन ठुमकड़ा
मैं तो ऐंवई ऐंवई लुट गया
कजरारे- कजरारे तेरे कारे कारे नैना
ढोली तारो ढोल बाजे ढोल बाजे
तेरे माथे झूमर चमके रे, माही वे
लेट्स डू द ठुमका ऑन द शादी वाली नाईट
दम दम दम मस्त है
तेनू घोड़ी किन्‍नै चढ़ाया भूतनी के
साजन जी घर आये
मौजा ही मौजा
फेरों तथा विदाई गीत –  
तारे हैं बाराती चांदनी है ये बारात
बन्नो रे बन्नो मेरी चली ससुराल को
कहता है बाबुल ओ मेरी बिटिया
जब तक पूरे ना हो फेरे साथ
बाबुल का ये घर बहना
बाबुल की दुआएं लेती जा
मैं ससुराल नहीं जाऊंगी
बाबुल जो तुमने सिखाया
काहे को ब्याही बिदेस
रानी बेटी राज करेगी

फैमिली परफॉर्मेंस के लिए गाने –  

1. लंदन ठुमकदा (फिल्म- क्वीन)
2. कर गई चुल (फिल्म- कपूर एंड संस)
3. बन्नो (फिल्म- तनु वेड्स मनु रिटर्न्स)
4. टुकुर टुकुर (फिल्म- दिलवाले)
5. लेट्स नाचो (फिल्म – कपूर एंड संस)
6. अभी तो पार्टी शुरू हुई है (फिल्म – खूबसूरत)
7. राधा तेरी चुनरी (फिल्म- स्टूडेंट ऑफ द ईयर)
8. गुलाबो, जरा गंध फैला दो (फिल्म- शानदार)
9. दिल्ली वाली गर्लफ्रेंड (फिल्म- ये जवानी है दीवानी)
10. चिट्टियां कलाइयां (फिल्म रॉय)
11. गल मिट्ठी मिट्ठी बोल, फिल्म – आयशा
12. सूरज डूबा है, फिल्म – रॉय
13. बेबी डॉल, फिल्म – रागिनी एमएमएस-2
14. नचदे ने सारे, फिल्म – बार बार देखो
15. गल्लां गूड़ियां, फिल्म – दिल धड़कने दो
16. नवराई मांझी, फिल्म – इंगलिश विंगलिश
17. लौंग दा लश्कारा, फिल्म – पटियाला हाउस
18. काला चश्मा, फिल्म – बार बार देखो
19. देंगड़ देंगड़ , फिल्म – हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया
20. ढोल यारा ढोल, फिल्म – देव डी
21. स्वैग से करेंगे सबका स्वागत, फिल्म – टाइगर जिंदा है
22. साड्डी गली, फिल्म – तनु वेड्स मुन
23. गॉगल सॉन्ग, फिल्म – मुबारकां
24. तू…तू मेरी, फिल्म – बैंग बैंग
25. छलका छलका रे…, फिल्म – साथिया
26. इसकी उसकी, फिल्म – 2 स्टेट्स
27. ससुराल गेंदा फूल (फिल्म- दिल्ली -6)
28. मेहंदी है रचनेवाली (फिल्म- ज़ुबैदा)
29. मौजा ही मौजा, फिल्म – जब वी मेट

दुल्हन और उसकी सहेलियों के लिए शादी के फिल्मी गीत  

1. क्यूटीपाई, फिल्म- ए दिल है मुश्किल
2. झाला वाला, फिल्म – इशकज़ादे
3. गर्ल्स लाइक टू स्विंग, फिल्म – दिल धड़कने दो
4. ड्रामा क्वीन, फिल्म – हंसी तो फंसी
5. घनी बावरी, फिल्म – तनु वेड्स मनु रिटर्न्स
6. गुलाबो, फिल्म – शानदार
7. व्हाट्स अप, फिल्म – फिल्लौरी
8. मूव योर लक, फिल्म – नूर
9. तुम्ही हो बंधु, फिल्म – कॉकटेल
10. चार बज गए हैं, फिल्म – फालतू
11. मेरे ख्वाबों में जो आए, फिल्म – दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे
12. हवा हवाई, फिल्म – तुम्हारी सुलु
13. लैला मैंं लैला, फिल्म – रईस
14. एक दो तीन, फिल्म – बागी- 2
15. बॉम दिग्गी दिग्गी , फिल्म – सोनू के टीटू की स्वीटी
16. ब्रेकअप सॉन्ग, फिल्म – ऐ दिल है मुश्किल
17. हसीनों को दीवाना (रिमिक्स), फिल्म – काबिल
18. स्वीटी तेरा ड्रामा, फिल्म – बरेली की बरफी
19. दिल चोरी, फिल्म – सोनू के टीटू की स्वीटी

शादी का संगीत के लिए 90 के दशक के विवाह के गीत –   

1. हुस्न है सुहाना, फिल्म कुली नम्बर 1
2. टन टना टन…, जुड़वां
3. ओ ओ जाने जाना, फिल्म – प्यार किया तो डरना क्या
4. चुनरी चुनरी, फिल्म – बीवी नम्बर 1
5. सात समंदर पार से, फिल्म – विश्वात्मा
6. ओले ओले, फिल्म – दिल्लगी
7. तू चीज़ बड़ी है मस्त मस्त, फिल्म – मोहरा
8. ढोली तारो, फिल्म – हम दिल दे चुके सनम
9. छैंया छैंया, फिल्म – दिल से
11. चोली के पीछे क्या है, फिल्म – खलनायक
12. दीदी तेरा देवर दीवाना, फिल्म – हम आपके हैं कौन
13. किस डिस्को में जाएं, फिल्म – बड़े मियां छोटे मियां
14. अंखियों से गोली मारे, फिल्म – दूल्हे राजा
15. केम छे, फिल्म – जिस देश में गंगा रहती है
16. आंख मारे, फिल्म – तेरे मेरे सपने
17. चुरा के दिल मेरा, फिल्म – मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी
18. ये काली काली आंखें, फिल्म – बाजीगर

संगीत नाइट पर ब्राइड की सोलो परफॉर्मेंस के लिए टॉप गाने –  

1. इश्क सूफियाना, फिल्म – द डर्टी पिक्चर
2. दीवानी मस्तानी, फिल्म – बाजीराव मस्तानी
3. अम्बरसरिया, फिल्म – फुकरे
4. राधा, फिल्म – जब हैरी मेट सेजल
5. पल्लो लटके, फिल्म – शादी में जरूर आना
6. घूमर, फिल्म – पदमावत
7. बेबी को बेस पसंद है, फिल्म – सुल्तान
8. स्वीटी तेरा ड्रामा, फिल्म – बरेली की बरफी
9. मोह मोह के धागे, फिल्म दम लगा के हईशा
10. नैनों वाले ने…, फिल्म – पदमावत
11. बहारा, फिल्म – आई हेट लव स्टोरीज़
12. मै नचदी फिरां, फिल्म – सीक्रेट सुपरस्टार
13. ले डूबा.., फिल्म – अय्यारी
14. दिलबरो, फिल्म – राज़ी
15. राब्ता टाइटल ट्रैक, फिल्म – राब्ता
16. नज्म नज्म, फिल्म – बरेली की बरफी
17. इक वारी आ…, फिल्म राब्ता
18. लागी ना छूटे, फिल्म – ए जेंटलमेन
19. सोच ना सके, फिल्म – एयरलिफ्ट
20. पिया ओ रे पिया, फिल्म – तेरे नाल लव हो गया
21. हमसफर, फिल्म – बद्रीनाथ की दुल्हनिया
22. इन्ना सोणा, फिल्म – ओके जानू
23. हम्मा हम्मा, फिल्म – ओके जानू
24. अगर तुम साथ हो, फिल्म – तमाशा
25. नज़दीकियां, फिल्म – शानदार
26. पहली बार, फिल्म – दिल धड़कने दो
27. फट्टे तक नाचना, फिल्म – डॉली की डोली
28. जग घूमिया थारे जैसा, (फीमेल वर्जन) फिल्म – सुल्तान

अरे, अब तो अपनी संगीत नाइट में खूब जमकर डांस और मस्ती कीजिये !

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फ़िल्मी विवाह गीत

सगाई और संगीत के गीत –  
आज है सगाई सुन लड़की के भाई
कहती है मंगनी की अंगूठी प्रीत निभाना राजा जी
मेरी बन्नो की आएगी बारात
छलका छलका रे कलसी का पानी
बन्नो तेरी अखियां सुरमेदानी
बन्नो की सहेली रेशम की डोरी
दूल्हे का सालियों ओ हरे दुपट्टे वालियों
वाह वाह राम जी जोड़ी क्या बनाई
तुझको बना कर के ले जायेंगे बद्री की दुल्हनिया
छोटे छोटे भाइयों के बड़े भैया
मेहंदी और हल्दी के गीत –  
मेहंदी लगा के रखना डोली सजा के रखना
मेहंदी है रचने वाली
मेहंदी तो मेंहदी है रंग लाएगी
मेहंदी लगा के आई बिंदिया सजा के आई
मेहंदी लगाउंगी में सजना के नाम की
मेहंदी लगाऊं किसके नाम की
दीदी तेरा देवर दीवाना
लिख के मेहंदी से सजना का नाम
सच कहते हैं हम कसम से
बोले चूड़ियां बोले कंगना, हाय मैं हो गया तेरा साजना

बारात और शादी के गीत हिंदी में –  

लन्दन ठुमकड़ा
मैं तो ऐंवई ऐंवई लुट गया
कजरारे- कजरारे तेरे कारे कारे नैना
ढोली तारो ढोल बाजे ढोल बाजे
तेरे माथे झूमर चमके रे, माही वे
लेट्स डू द ठुमका ऑन द शादी वाली नाईट
दम दम दम मस्त है
तेनू घोड़ी किन्‍नै चढ़ाया भूतनी के
साजन जी घर आये
मौजा ही मौजा
फेरों तथा विदाई गीत –  
तारे हैं बाराती चांदनी है ये बारात
बन्नो रे बन्नो मेरी चली ससुराल को
कहता है बाबुल ओ मेरी बिटिया
जब तक पूरे ना हो फेरे साथ
बाबुल का ये घर बहना
बाबुल की दुआएं लेती जा
मैं ससुराल नहीं जाऊंगी
बाबुल जो तुमने सिखाया
काहे को ब्याही बिदेस
रानी बेटी राज करेगी

संगीत सेरेमनी में फैमिली परफॉर्मेंस के लिए गाने –  

1. लंदन ठुमकदा (फिल्म- क्वीन)
2. कर गई चुल (फिल्म- कपूर एंड संस)
3. बन्नो (फिल्म- तनु वेड्स मनु रिटर्न्स)
4. टुकुर टुकुर (फिल्म- दिलवाले)
5. लेट्स नाचो (फिल्म – कपूर एंड संस)
6. अभी तो पार्टी शुरू हुई है (फिल्म – खूबसूरत)
7. राधा तेरी चुनरी (फिल्म- स्टूडेंट ऑफ द ईयर)
8. गुलाबो, जरा गंध फैला दो (फिल्म- शानदार)
9. दिल्ली वाली गर्लफ्रेंड (फिल्म- ये जवानी है दीवानी)
10. चिट्टियां कलाइयां (फिल्म रॉय)
11. गल मिट्ठी मिट्ठी बोल, फिल्म – आयशा
12. सूरज डूबा है, फिल्म – रॉय
13. बेबी डॉल, फिल्म – रागिनी एमएमएस-2
14. नचदे ने सारे, फिल्म – बार बार देखो
15. गल्लां गूड़ियां, फिल्म – दिल धड़कने दो
16. नवराई मांझी, फिल्म – इंगलिश विंगलिश
17. लौंग दा लश्कारा, फिल्म – पटियाला हाउस
18. काला चश्मा, फिल्म – बार बार देखो
19. देंगड़ देंगड़ , फिल्म – हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया
20. ढोल यारा ढोल, फिल्म – देव डी
21. स्वैग से करेंगे सबका स्वागत, फिल्म – टाइगर जिंदा है
22. साड्डी गली, फिल्म – तनु वेड्स मुन
23. गॉगल सॉन्ग, फिल्म – मुबारकां
24. तू…तू मेरी, फिल्म – बैंग बैंग
25. छलका छलका रे…, फिल्म – साथिया
26. इसकी उसकी, फिल्म – 2 स्टेट्स
27. ससुराल गेंदा फूल (फिल्म- दिल्ली -6)
28. मेहंदी है रचनेवाली (फिल्म- ज़ुबैदा)
29. मौजा ही मौजा, फिल्म – जब वी मेट

दुल्हन और उसकी सहेलियों के लिए शादी के फिल्मी गीत – Shaadi ke Gaane
1. क्यूटीपाई, फिल्म- ए दिल है मुश्किल
2. झाला वाला, फिल्म – इशकज़ादे
3. गर्ल्स लाइक टू स्विंग, फिल्म – दिल धड़कने दो
4. ड्रामा क्वीन, फिल्म – हंसी तो फंसी
5. घनी बावरी, फिल्म – तनु वेड्स मनु रिटर्न्स
6. गुलाबो, फिल्म – शानदार
7. व्हाट्स अप, फिल्म – फिल्लौरी
8. मूव योर लक, फिल्म – नूर
9. तुम्ही हो बंधु, फिल्म – कॉकटेल
10. चार बज गए हैं, फिल्म – फालतू
11. मेरे ख्वाबों में जो आए, फिल्म – दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे
12. हवा हवाई, फिल्म – तुम्हारी सुलु
13. लैला मैंं लैला, फिल्म – रईस
14. एक दो तीन, फिल्म – बागी- 2
15. बॉम दिग्गी दिग्गी , फिल्म – सोनू के टीटू की स्वीटी
16. ब्रेकअप सॉन्ग, फिल्म – ऐ दिल है मुश्किल
17. हसीनों को दीवाना (रिमिक्स), फिल्म – काबिल
18. स्वीटी तेरा ड्रामा, फिल्म – बरेली की बरफी
19. दिल चोरी, फिल्म – सोनू के टीटू की स्वीटी

शादी का संगीत के लिए 90 के दशक के विवाह के गीत – 90s Hindi Songs

1. हुस्न है सुहाना, फिल्म कुली नम्बर 1
2. टन टना टन…, जुड़वां
3. ओ ओ जाने जाना, फिल्म – प्यार किया तो डरना क्या
4. चुनरी चुनरी, फिल्म – बीवी नम्बर 1
5. सात समंदर पार से, फिल्म – विश्वात्मा
6. ओले ओले, फिल्म – दिल्लगी
7. तू चीज़ बड़ी है मस्त मस्त, फिल्म – मोहरा
8. ढोली तारो, फिल्म – हम दिल दे चुके सनम
9. छैंया छैंया, फिल्म – दिल से
11. चोली के पीछे क्या है, फिल्म – खलनायक
12. दीदी तेरा देवर दीवाना, फिल्म – हम आपके हैं कौन
13. किस डिस्को में जाएं, फिल्म – बड़े मियां छोटे मियां
14. अंखियों से गोली मारे, फिल्म – दूल्हे राजा
15. केम छे, फिल्म – जिस देश में गंगा रहती है
16. आंख मारे, फिल्म – तेरे मेरे सपने
17. चुरा के दिल मेरा, फिल्म – मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी
18. ये काली काली आंखें, फिल्म – बाजीगर

संगीत नाइट पर ब्राइड की सोलो परफॉर्मेंस के लिए टॉप गाने –  

1. इश्क सूफियाना, फिल्म – द डर्टी पिक्चर
2. दीवानी मस्तानी, फिल्म – बाजीराव मस्तानी
3. अम्बरसरिया, फिल्म – फुकरे
4. राधा, फिल्म – जब हैरी मेट सेजल
5. पल्लो लटके, फिल्म – शादी में जरूर आना
6. घूमर, फिल्म – पदमावत
7. बेबी को बेस पसंद है, फिल्म – सुल्तान
8. स्वीटी तेरा ड्रामा, फिल्म – बरेली की बरफी
9. मोह मोह के धागे, फिल्म दम लगा के हईशा
10. नैनों वाले ने…, फिल्म – पदमावत
11. बहारा, फिल्म – आई हेट लव स्टोरीज़
12. मै नचदी फिरां, फिल्म – सीक्रेट सुपरस्टार
13. ले डूबा.., फिल्म – अय्यारी
14. दिलबरो, फिल्म – राज़ी
15. राब्ता टाइटल ट्रैक, फिल्म – राब्ता
16. नज्म नज्म, फिल्म – बरेली की बरफी
17. इक वारी आ…, फिल्म राब्ता
18. लागी ना छूटे, फिल्म – ए जेंटलमेन
19. सोच ना सके, फिल्म – एयरलिफ्ट
20. पिया ओ रे पिया, फिल्म – तेरे नाल लव हो गया
21. हमसफर, फिल्म – बद्रीनाथ की दुल्हनिया
22. इन्ना सोणा, फिल्म – ओके जानू
23. हम्मा हम्मा, फिल्म – ओके जानू
24. अगर तुम साथ हो, फिल्म – तमाशा
25. नज़दीकियां, फिल्म – शानदार
26. पहली बार, फिल्म – दिल धड़कने दो
27. फट्टे तक नाचना, फिल्म – डॉली की डोली
28. जग घूमिया थारे जैसा, (फीमेल वर्जन) फिल्म – सुल्तान

अरे, अब तो अपनी संगीत नाइट में खूब जमकर डांस और मस्ती कीजिये !

इन्हें भी देखें –
1. सोनम की विदाई के लिए टॉप 8 बॉलीवुड गीत, जो हर दुल्हन को देखने चाहिए
2. सोनम के टॉप 15 रोमांटिक बॉलीवुड गाने, जो उनकी शादी के संगीत के लिए रहेंगे हिट
3. आखिर कौन हैं बॉलीवुड की मेहंदी क्वीन, जिन्होंने सोनम के हाथों पर रचाई इतनी खूबसूरत मेहंदी
4. प्यार की धुन : कपल डांस के लिए 10 नये रोमांटिक बॉलीवुड गीत
5. हल्दी सेरेमनी में चार-चांद लगा देंगे ये हल्दी सॉन्ग
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