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शनिवार, 30 मार्च 2013

होली पर साधनाए

होली पर साधनाए

सम्पूर्ण भारत वर्ष के लोग विभिन्न रीती रिवाज के अनुसार होली के अवसर को मनाने में गौरव महसूस करते है । वेद पुराणो से लेकर सम्पूर्ण विश्व में भी होली के प्रचलन का पता चलता है । भगवान शिव से लेकर गुरु गोरखनाथ जी ने भी इसे विशेष साधना पर्व कहा जाता है ।
कैसे करे पूजन

एक थाली में कुमकुम , हल्दी , मेहंदी ,साबुत मुंग , अक्षत , अबीर गुलाल , कपूर , फूल ,प्रसाद , घर में बने पकवान , नारियल , फल आदि के अलावा नए वस्त्र का टुकड़ा या कच्चा सूत धुप अगरबत्ती और जल कलश रखे । होलिका को किसी भी प्रकार के पुष्प अर्पित किये जा सकते है । सर्वप्रथम "ॐ श्री गणेशाय नम:" पञ्च बार बोल कर होलिका को जल अर्पित करे । इसके बाद उस पर कुमकुम ,अबीर, गुलाल, हल्दी, मेहंदी तथा अक्षत चढ़ाये । साबुत मुंग प्रसाद , फल भी अर्पित करे । फिर वस्त्र और कच्चा सूत होलिका के चारो और लपेट ले । पुष्प अर्पित करे और होलिका की परिक्रमा करे । परिक्रमा के अंत में बचा हुआ जल भी वाही चढ़ा दे । हाथ जोड़कर पुष्पांजली नमस्कार करे और निम्न मंत्रो का 9 बार उच्चारण करे ।
ॐ होलीकाय नम: ॐ प्रहलादाय नम: ।।
ॐ भगवान न्रसिन्हाय नम:।।
परिक्रमा करते समय अपने और परिवार के कल्याण की कमाना करे । यह भी प्रार्थना करे की होलिका माता हमें आरोग्य दो , शांति दे , हमें हर तरह से सुखी रखे , हम स्वस्थ रहे , प्रसन्नचित रहे । इस व्प्रकार आप जो भी कामना करे , अंत में थोड़े से कपूर को जलाकर होलिका की आरती करे । होलिका दहन के दुसरे दिन सर्वप्रथम अपने इष्ट व् माता पिता , गुरु व् बड़ो को अबीर गुलाल अर्पित करे । अपने घर के इशान कोण का पूजन कर वहा भी गुलाल अर्पित करे । इससे निवास के सभी वष्टु दोष दूर हो जाते है ।
कामना के साथ आराधना

नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति प्राप्त करने हेतु :-
नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति हेतु होलिका दहन के पश्चात् होली की जलती हुई राख लाये । इसे किसी पत्र में रख दे । उसके ऊपर लोबान , शुद्ध गुग्गुल , चन्दन डाले और घर के कोने कोने में घुमाये । अंत में मुख्य दरवाजे पर आ जाये । वह इसे निचे रखकर इसके ऊपर कपूर की तीन गोलिया रखे और जला दे । उनके जल जाने के बाद उसे ढक दे । जिससे हवा से उसकी राख न उड़े । दुसरे दिन प्रात: काल उठकर होलिका की राख पर ठंडा पानी डाल कर उसे जल में प्रवाहित करे या पीपल वृक्ष के नीचे रख दे । आपका घर किसी भी नजर दोष तथा नकारात्मक शक्तियों से मुक्त रहेगा । रोग , शोक दूर होकर सुख समृद्धि मिलेगी ।
व्यापार और कारोबार में सफलता प्राप्ति हेतु :-
यह उपाय उन लोगो के लिए लाभदायक है जो व्यवसाय ठीक से न चल पाने के कारण कर्ज आदि की समस्या से पीड़ित है । 11 गोमती चक्र लाये । धन के बाद होली की राख लाये और दरवाजे के पास किसी चीज से ढक कर रख दे । सोने से पहले इस राख के चारो और जल डाले । गोमती चक्र राख के नीचे दबा दे और रात को पुन: ढंक दे । दुसरे दिन प्रात : राख पर ठन्डे जल के छीटे मारे और दबे हुए गोमती चक्र निकाल कर सुरक्षित रख ले । राख को बहते हुए पानी में प्रवाहित करे या पीपल के वृक्ष के नीचे रख दे । जल का एक छोटा पात्र रखे दीपक प्रज्वलित कर अपने आराध्य के किसी मन्त्र या "ॐ श्री यै नम:" का 108 बार जाप कर प्रणाम कर , गोमती चक्र को लाल वस्त्र में बांधकर अपने तिजोरी में या गल्ले में रख दे इसके बाद पूरी क्षमता से कार्य करे । सकारात्मक सोच रखे व्यवसाय में आ रही बढ़ाये शीघ्र समाप्त हो जाएगी
संतान सम्बन्धी समस्याओं के निराकरण हेतु :-
यदि बच्चो सम्बन्धी किसी कार्यो में रूकावट आ रही हो तो होली के दिन होलिका दहन से पूर्व मंदिर में भगवान कृष्ण की सुंदर पोशाक अर्पित करे । संभव हो तो वह पोशाक भगवान को उसी दिन पहन दे । इसी के साथ संतान के कल्याण की कामना करे । इस से सुख समृद्धि तथा संतान सम्बन्धी कष्टों से छुटकारा मिलेगा ।
रोग मुक्ति हेतु :-
परिवार में यदि कोई असाध्य रोगी है , तो चार गोमती चक्र लाकर उन्हें जल से स्वच्छ करे डंठल सहित 2 पान के पत्ते ले । एक जोड़ा लॉन्ग को को शुद्ध घी में डुबोकर पान के पत्तो पर रखे । और पान के पत्तो को इस प्रकार लपेट ले की की साडी सामग्री अन्दर बंद हो जाये । चाहे तो काले धागे में लपेट सकते है । अब दाये हाथ में चार गोमती चक्र तथा बाए हाथ में पान को लेकर होलिका की अग्नि में डाल दे । होलिका को प्रणाम करे और गोमती चक्र घर ले जाए । वे चारो गोमती चक्र रोगी के पलंग के चारो पायो पर बांध दे । रोगी की जो चिकित्सा चल रही है उसे चलने दे । रोजाना सुबह उठते ही रोगी के स्वास्थ्य की कामना करे , लाभ मिलेगा ।
धन वृद्धि करने हेतु :-
हल्दी मिले पीले चावल ले । चावल किसी डिब्बे में रखे । डिब्बा अगर चंडी का हो तो अति उत्तम । डिब्बे में तीन कमल गट्टे के दाने और ताम्बे का सिक्का रखे और लाल कपडे में लपेट ले । होलिका दहन होने पर डिब्बे के साथ 7 परिक्रमा करे । परिक्रमा करते समय होलिका से प्रार्थना करते जाए । इस डिब्बे को तिजोरी या धन रखने वाली जगह रखे ।
राशी और होली के रंग

मेष :- गहरा लाल , टेसू के फूलो से तैयार पीला रंग ।

वृषभ :- क्रीम , सिल्वर , हरा , नीला कलर खुशबू मिलाकर ।

मिथुन :- हरा , सिल्वर या क्रीम और हल्का नीला ।

कर्क :- हल्का नीला , गुलाबी , सुनहरी या हार सिंगार के फूलो से तैयार ।

सिंह :-सुर्ख पीला या केसरिया , हल्का पीला और गुलाबी रंग ।
कन्या :- गहरा हरा रंग , गहरा नीला , सिल्वर कलर ।

तुला :- हल्का गुलाबी , हल्का नीला , और हरा रंग ।

वृश्चिक :- गहरा लाल रंग , पीला और हल्का नीला रंग ।

धनु :- पीला यी हार सिंगार के फूलो का रंग , गहरा लाल और गहरा कुसुमल रंग ।

मकर :-गहरा नीला , सिल्वर या क्रीम रंग और हरा रंग ।

कुम्भ :-हल्का नीला , हरा और हल्का गुलाबी रंग ।

मीन :- सुनहरी या हार सिंगार के फूलो का रंग , हल्का नीला और गुलाबी ।

होली के अवसर पर दान करते समय सावधानिया

होली , दीपावली , ग्रहण आदि कुछ ऐसे विशेष अवसर होते है । जिन पर सोच समझ कर ही दान करना चाहिए । राशी के अनुसार हमारी दशा अंतर दशा देख कर ही दान करना चाहिए अगर हम सोच समझ कर दान नहीं करे तो उसका विपरीत प्रभाव भी देखने को मिल सकता है ।
अत: आईये जाने की राशियों के अनुसार हमें किस चीज का और क्या दान करना चाहिए ।
बुध की दशा :- अंतर दशा बुध की चल रही हो या बुध गृह कमजोर हो , बुध बलहीन हो या पाप ग्रहों से दृष्ट हो तो आपको हरा वस्त्र , मुंग कपूर , पालक , घी , हरी घास दान करे ।
मंगल की दशा :- मंगल की अन्तर्दशा चल रही हो । मंगल बलहीन और उस पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो तो ताम्बा , सोना , गेहू , लाल वस्त्र , गुड , लाल चन्दन , मसूर की दाल आदि का दान करे ।
चन्द्र की दशा :- चन्द्र की अंतर दशा चल रही हो । चन्द्र बलहीन हो या उस पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो तो तम्बा , सोना , गेहू , दूध , चावल , कपूर , सफ़ेद वस्त्र , चाँदी , शंख , चीनी आदि दान करे ।
राहू की दशा :- राहू की अन्तर्दशा चल रही हो । रहू बलहीन हो या उस पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो । तो लोहा , तिल , पुराना वस्त्र , कम्बल सप्त धान , उड़द , तेल आदि का दान करे ।
गुरु की दशा :- गुरु की अन्तर्दशा चल रही हो या गुरु बलहीन हो । या उस पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो तो पीला वस्त्र , हल्दी , चने की दाल , पपीता , घी , पुस्तक आदि का दान करे ।
केतु की दशा :-केतु की अंतर दशा चल रही हो या केतु बलहीन हो तो तिल का दान , काला वस्त्र , सप्त धान , कम्बल , उड़द , तेल , लोहा आदि दान करे ।
सूर्य की दशा :-सूर्य की अंतर दशा चल रही हो । सूर्य बलहीन हो या उस पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो तो गेंहू , गुड , रक्त चन्दन , लाल वस्त्र , ताम्बा आदि का दान करे ।

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