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रविवार, 12 अगस्त 2012

कृष्ण भजन: हे श्यामसुंदर... --स्व. शांति देवी वर्मा

कृष्ण भजन:
हे श्यामसुंदर...





स्व. शांति देवी  वर्मा

*
हे श्यामसुंदर! हे मनमोहना! चरणों में अपने बुला लेना.

कर नजर दयामय मधुसूदन, मन भावन झलक दिखा देना...
*
नंदलाल मैं तेरी सेवा करूँ, तेरी सांवरी सूरत दिल में धरूँ.

न्योछावर माधुरी मूरत पर, चरणों में शरण सदा देना...
*
नयनों में तेरा ही ध्यान रहे, कानों में गुंजित गान रहे.

मम हृदय में तेरा ही ध्यान रहे, भाव सागर पार करा देना...
*
तुम चक्र सुदर्शनधारी हो, गिरधारी हो बनवारी हो.

गोपाल, कृष्ण, कान्हा, नटवर, मुरली की तान सुना देना...
*
भारत में फिर प्रभु आ जाओ, गीता का ज्ञान करा जाओ.

माया से मुक्ति दिल जाओ, सुख-'शांति' अमिय बरसा देना...
***
Acharya Sanjiv verma 'Salil'

http://divyanarmada.blogspot.com
http://hindihindi.in



रविवार, 17 मई 2009

आरोग्य-आशा: अतिसार, -स्व. शान्ति देवी



इस स्तम्भ के अंतर्गत पारंपरिक चिकित्सा-विधि के प्रचलित दिए जा रहे हैं। हमारे बुजुर्ग इन का प्रयोग कर रोगों से निजात पाते रहे हैं।
आपको ऐसे नुस्खे ज्ञात हों तो भेजें।


इनका प्रयोग आप अपने विवेक से करें, परिणाम के प्रति भी आप ही जिम्मेदार होंगे, लेखक या संपादक नहीं।


रोग: अतिसार, दस्त



इन्द्र जौ का चूर्ण या दाल चीनी का चूर्ण खाने से अतिसार दूर होता है।




इन्द्र जौ या दाल चीनी, का बना लें चूर्ण।

खाएं तो अतिसार से रहत मिले सम्पूर्ण॥


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बुधवार, 31 दिसंबर 2008


निधन/स्मरण  :

वरिष्ठ कवयित्री शान्ति देवी वर्मा का निधन
जबलपुर, २४-११-२००८।
     वरिष्ठ कवयित्री व लेखिका श्रीमती शान्ति देवी वर्मा का ८६ वर्ष की आयु में आज जबलपुर में निधन हो गया। बापू के नेतृत्व में स्वंतंत्रता सत्याग्रही बनने के लिए ऑनरेरी मजिस्ट्रेट पद से त्यागपत्र देकर विदेशी वस्त्रों की होली जलानेवाले राय बहादुर माता प्रसाद सिन्हा 'रईस' मैनपुरी उत्तर प्रदेश की ज्येष्ठ पुत्री शान्ति देवी का विवाह जबलपुर मध्य प्रदेश के स्वतंत्रता सत्याग्रही स्व. ज्वाला प्रसाद वर्मा के छोटे भाई श्री राजबहादुर वर्मा सेवा निवृत्त जेल अधीक्षक से हुआ था। साहित्यिक संस्था 'अभियान' जबलपुर, रचनाकारों हेतु दिव्य नर्मदा अलंकरण, दिव्य नर्मदा पत्रिका तथा समन्वय प्रकाशन की स्थापना कर नगर की साहित्यिक चेतना को गति देने में उन्होंने महती भूमिका निभायी। अपने पुत्र संजीव वर्मा 'सलिल', पुत्री आशा वर्मा तथा पुत्रवधू डॉ. साधना वर्मा को साहित्यिक रचनाकर्म तथा समाज व् पर्यावरण सुधार के कार्यक्रमों के माध्यम से सतत समर्पित रहने की प्रेरणा उनहोंने दी। उनके निधन के साथ इतिहास का एक अध्याय समाप्त हो गया। उनके अन्तिम संस्कार में सनातन सलिला नर्मदा तट पर ग्वारीघाट में बड़ी संख्या में साहित्यकार, समाज सुधारक तथा सम्बन्धी सम्मिलित हुए।