रविवार, 7 जनवरी 2018

2018 ki laghukathayen

२०१८ की लघुकथाएँ: ४
दोषी
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वे बचपन से एक-साथ खेलते-कूदते हुए बड़े हुए, संयोगवश एक ही विद्यालय में साथ ही पढ़ रहे थे। परीक्षाफल आया तो वह प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण था किंतु वह अनुत्तीर्ण हो गयी थी।
इसे अपनी सफलता की ख़ुशी से अधिक दुःख उसकी असफलता का था क्योंकि उसी की पुस्तकें लेकर यह साल भर पढ़ता रहा था।
शाम को उद्यान में दोनों मिले तो वह बधाई देते हुए इसके गले लग गयी। यह अवाक था यह देखकर कि कि वह अपनी असफलता से दुखी कम और इसकी सफलता से सुखी अधिक थी। इसने तय किया कि अब ऐसा नहीं होगा , वह अपने साथ-साथ इसकी तैयारी पर भी ध्यान देगा।
दोनों अपने-अपने घर लौटे।  इसने अपने घर पर कहर बरपा हुआ पाया। उसके माता-पिता इसके माता-पिता पर नाराज हो रहे थे कि इसकी संगत में वह बिगड़ गई है। इसके माता-पिता बोले कि वह बिगड़ी है, इससे दूर रहे।
इसके घर पर सन्नाटा पसरा हुआ था, माता-पिता ने लौटकर बताया कि वे क्या कर आये थे।
दोनों नासमझ नहीं समझ पा रहे थे कि जो कुछ घटा मिल-जुलकर उसे सुधारने का अवसर दें के स्थान पर उसे सुधारने के स्थान पर समझदार उन्हें क्यों ठहरा रहे हैं दोषी?   
५-१-२०१८, TIETJabalpur -------------------
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