मंगलवार, 16 जनवरी 2018

दोहा दुनिया

निराकार शिव से प्रगट,
होता हर आकार।
लीन सभी साकार हों,
शिव में एकाकार।।
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शिव शुभ ही शुभ रक्षते,
अशुभ तजें तत्काल।
शक्ति सहायक हो सदा,
शेष न रहे बबाल।।
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शिव हरदम संक्रांत हैं,
शिव पल-पल विक्रांत।
शिव न कभी उद्भ्रांत हों,
शिव न कभी दिग्भ्रांत।।
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परम शांति हैं, क्रांत भी,
शिव परिवर्तन शील।
श्यामछिद्र बनकर सतत,
रहे अशुभ हर लील।।
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१४.१.२०१८
सरिता विहार दिल्ली

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