बुधवार, 3 जनवरी 2018

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नवगीत
चुप बैठा धुनिया
अवनीश सिंह चौहान
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सोच रहा              ६
चुप बैठा धुनिया   १०
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भीड़-भाड़ वह       ८
चहल-पहल वह    ८
बंद द्वार का          ८
एक महल वह      ८
ढोल मढ़ी सी       ८
लगती दुनिया    ८
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मेहनत के मुँह   ८
(यहाँ मेहनत का उच्चारण मिहनत लिया गया है।  ऐसा करना ठीक नहीं है)
बँधा मुसीका     ८
घुटता जाता      ८
गला खुशी का    ८
ताड़ रहा है         ८
सब कुछ गुनिया ८
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फैला भीतर       ८
तक सन्नाटा     ८
अँधियारों ने       ८
सब कुछ पाटा    ८
कहाँ-कहाँ से       ८
टूटी पुनिया        ८
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