बुधवार, 20 दिसंबर 2017

दोहा दुनिया

शिव जैसा दूजा नहीं,
अपनी आप मिसाल.
कभी स्याह दिखते कभी,
जलती हुई मशाल.
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पूजा-भेंट न चाहिए,
चाहें श्रद्धा-भाव.
भूत, सुरासुर, नर सभी,
झुकते मान प्रभाव.
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शिवा सुनीता पुनीता,
शिव का अशुभ सिँगार.
श्वेत-श्याम संगम करे
सकल सृष्टि-उद्धार.
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शिवता में प्रभुता नहीं,
प्रभुता प्रभु का भाव.
प्रभुओं के प्रभु-पूज्य शिव,
शिवज कृपा सम्भाव.
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शिवा न शिव बिन पूर्ण हैं,
शिव न शिवा बिन पूर्ण.
बिना शिवा-शिव सृष्टि ही,
सारी रहे अपूर्ण.
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20.12.2018

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