रविवार, 31 दिसंबर 2017

navgeet

नवगीत:
एक दिन क्यों?
*
एक दिन क्यों?
हर दिवस को
साल नूतन तुम समझना
*
सुबह जगना
आँख मलना
पैर धरती पर जमाना
गिर पड़ो तो मुस्कुराना
उठ खड़े हो
लक्ष्य पाना।
कोई रोके
कोई टोके, मत उलझना।
*
हो पड़ोसी 
गिद्ध-कौआ
तो न सोना, जगे रहना 
सरहदोँ पर डटे रहना
ध्वजा अपनी
झुक न जाए.
जान लेना 
जाँ न देना, झट सुलझना.
....


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