गुरुवार, 28 दिसंबर 2017

दोहा दुनिया

शिव बाघाम्बर पहनकर,
होते वृषभ-सवार.
शिवा बाघ पर विराजें,
किंतु नहीं तकरार.
.
गणपति शिव के सुत नहीं
देहज- मानस पूत.
जननि न कार्तिक की शिवा,
माँ-सुत बंध अकूत.
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गणपति मति का कोष हैं,
ऋद्धि-सिद्धि नित साथ.
विघ्न मूस-आसीन हो,
निष्कंटक गणनाथ.
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कार्तिक संग मयूर है,
जिसे न सोहे सर्प.
संग-साथ हिलमिल रहें.
भुला शत्रुता-दर्प.
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केर-बेर के संग सा,
है शिव का परिवार.
शिव हैं पशुपतिनाथ पर,
करें जगत्-उद्धार.
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रखें संतुलन-समन्वय,
भले-बुरे के बीच.
शिव सिखलाते जन्म दे,
शुभ को आदिम कीच.
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घृणा-द्वेष मत पालिए,
रखें नियंत्रित क्रोध.
सबका शुभ करते रहें,
करा रहे शिव बोध.
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28.12.2017

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