बुधवार, 27 दिसंबर 2017

दोहा दुनिया

शिव भूखे हैं भाव के,
शिव को भाती भक्ति.
शिवा न शिव से भिन्न हैं.
शिव चरणों में मुक्ति.
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भज न कभी भी स्वार्थवश,
भजन करो निस्वार्थ.
शिव होते उस पर सदय,
जो भजता सर्वार्थ.
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असुरों को वरदान दें,
सुर के हैं शिव इष्ट.
नर वानर किन्नर सभी,
शिव के साधक शिष्ट.
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शिव न भोग से भागते,
शिव न भोग में लीन.
योग-भोग संयोग ही,
जीवन-कला नवीन.
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क्रोध न करते शिव कभी,
शिव दिखलाते क्रोध.
सही-गलत क्या, क्या नहीं,
हो अबोध को बोध.
...
27.12.2018

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