गुरुवार, 21 दिसंबर 2017

navgeet

नवगीत- नया हस्ताक्षर
संवाद



सुनीता सिंह
*
क्या सोच कर
आईं यहाँ तुम
और क्या तुमको मिला है?
कह सकोगी??
.
चुन लिये माँ-बाप तुमने
इस धरा पर
आगमन को.
यह बताओ
देह देकर आत्मा को
कर सकीं
अपना चमन को?
कुछ कहो तो.

थे सुनहरे
ख्वाब जीने के
मिला तुमको सिला क्या?
कह सकोगी?
.
जब हुआ मालूम
पलती कोख में
नव चाँदनी है
यह बताओ
क्या हुई हलचल? समा क्या था?
खुशी थी या उदासी?
कुछ कहो भी.

आई हो तुम मान अपना
जिन जनों को
मिली उन निर्मोहियों से पीर कितनी
कह सकोगी?
.
साँस चलती, रोकने
मिल कैचियाँ
आगे बढ़ीं,
कैसे? बताओ.
कट रहे थे
अंग, घुटती सांस
की चीत्कार बेबस
भी सुनाओ।


सुन मौन चीखें
विधाता ने
दिया है अभिशाप कितना,
कह सकोगी?
****
18-12-2017

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