शनिवार, 23 दिसंबर 2017

दोहा दुनिया

लोभ, मोह, मद शूल हैं,
शिव जी लिए त्रिशूल.
मुक्त हुए, सब को करें,
मनुज न करना भूल.
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जो त्रिशूल के लक्ष्य पर,
निश्चय होता नष्ट.
बाणासुर से पूछिए,
भ्रष्ट भोगता कष्ट.
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तीन लोक रख सामने,
रहता मौन त्रिशूल.
अत्याचारी को मिले,
दंड हिला दे चूल.
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जर जमीन जोरू 'सलिल',
झगड़े की जड़ तीन.
शिव त्रिशूल छोड़े नहीं,
भूल अगर संगीन.
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शिव-त्रिशूल से काँपते,
देव दनुज नर प्रेत.
जो सम्मुख आया, हुआ
शिव प्रहार से खेत.
...
22.12.2017

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