शनिवार, 18 नवंबर 2017

laghkaha: sahishnuta

लघुकथा:
सहिष्णुता  
देश की स्वतंत्रता के लिए बलिदान करने का दावा कर येन-केन प्रकारेण सत्ता पर काबिज रहने तक येन-केन-प्रकारेण विरोधियों और विपक्षियों को परेशान करने झूठे मुकदमे चलाने लोकनायक जय प्रकाश पर लाठी चलाने, आपात काल लगाने, नेताजी सुभाषचन्द्र बोस प्रकरण में देश को गुमराह करने, शास्त्री जी के संदिग्ध निधन को छिपाने, सिखों को दंगों और कश्मीरी ब्राम्हणों को पलायन के बाद धोखा देनेवालों ने गत आम चुनाव में मिली पराजय से कोई सबक नहीं सीखा। विरोधी तो दूर अपने ही दाल के भीतर असहमति को न सह सकने वाले आब आरोप लगा रहे हैं प्रचुर जनमत से चुनी गयी सरकार पर असहिष्णुता का.
संसद ठप करने से मन नहीं भरा तो पुरस्कार वापिसी की नौटंकी करते समय यह तो सोच लें कि १९४७ से आपने देश के बहुसंखयक लोगों के प्रति कैसी सहिष्णुता दिखाई की उनकी जनसँख्या वृद्धि दर घट गयी और अल्पसंख्यकों की आबादी बढ़ने की दर बढ़ गयी.आप जिन्हें विरोधी दल के रूप में भी सहन नहीं कर पा रहे थे उन्हें जनता ने सत्ता सौंप कर परीक्षा आरम्भ कर दी है आपकी सहिष्णुता की और आप हो रहे हैं पूरी तरह असफल।

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