सोमवार, 6 नवंबर 2017

naye chhand 29-30

हिन्दी के  नए छंद २९-३०   
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प्रस्तुत छंद के समान मात्रिक-वर्णिक पदभार गति-यति युक्त छंद यदि आपने पढ़े हों तो कृपया, उनका सन्दर्भ, विधान व उदाहरण salil.sanjiv@gmail.com, ९४२५१८३२४४ पर भेजें। 
नव रचनाकार इन छंदों का अभ्यास करें। 
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नए छंद २९ 
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कन्हैया! कन्हैया!! बजा बाँसुरी, रूठ राधा न जाए, बजा बाँसुरी माधव!
मना राधिका नाज़ लेना उठा, रास लेना रचा तू, चला आ दिखा लाघव.
चलो ग्वाल-बालों!, नहीं बात टालो, करें रासलीला, नहीं चूको, करें गायन.
सुना फ़ाग-रासें, लला रंग डालें, लली भाग जाएँ करो बाँसुरी वादन.
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नए छंद ३० 
जगो रे!, उठो रे!!, खिलो फ़ूल जैसे, सुगंधें बिखेरो, सवेरे-सवेरे चलो.
न सोना, न खोना, नहीं मीत रोना, न हाथों धरो हाथ, मौके न  खोना, चलो.
नदी सा बहो रे!, न मौजे तहो रे! उठा शंख-सीपी, न भागो, गहो रे चलो.
तुम्हीं को पुकारें, तुम्हीं को निहारें, भुला मन्ज़िले दें न, जीतो सितारे चलो. 
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salil.sanjiv@gmail.com, ७९९९५५५९६१८
www.divyanarmada.in, #हिंदी_ब्लोगर

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