शुक्रवार, 17 नवंबर 2017

maahiya- pran sharma

माहिया
प्राण शर्मा  
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क्या तुमको भाती हूँ 
जुड़े में अपने 
जब फूल सजाती हूँ 
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नित मांग सजाती हूँ 
सच बतलाना तुम 
क्या तुमको भाती हूँ 
+
जगमग सा करता है 
तन पे तुम्हारे प्रिये 
हर फूल निखरता है 
+
जब मांग सजाती हो 
सचमुच ,जादू सा 
मन पर छा जाती हो 
+
क्या अच्छी लगती हूँ 
पीली साड़ी में 
मैं कैसी लगती हूँ 
+
जब सम्मुख आती हो 
सूर्यमुखी जैसी 
तुम ख़ूब सुहाती हो

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