गुरुवार, 16 नवंबर 2017

doha-doha raam

दोहा-दोहा राम  
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लक्ष्य रखे जो एक ही,
वह जन परम सुजान.
लख न लक्ष मन चुप करे
साध तीर संधान.
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लखन लक्ष्मण या कहें,
लछ्मन उसको आप.
राम-काम सौमित्र का,
हर लेता संताप.
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सिया-सिंधु की उर्मि ला,
अँजुरी रखें अँजोर.
लछ्मन-मन नभ, उर्मिला
मनहर उज्ज्वल भोर.
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लखन-उर्मिला देह-मन,
इसमें उसका वास.
इस बिन उसका है कहाँ,
कहिए अन्य सु-वास.
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मन में बसी सुवास है,
उर्मि लखन हैं फ़ूल.
सिया-राम गलहार में,
शोभित रहते झूल.
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