शनिवार, 21 जुलाई 2018

मुक्तिका: सहारा

मुक्तिका 
*
कल दिया था, आज लेता मैं सहारा 
चल रहा हूँ, नहीं अब तक तनिक हारा 
*
सांस जब तक, आस तब तक रहे बाकी 
जाऊँगा हँस, ईश ने जब भी पुकारा
*

देह निर्बल पर सबल मन, हौसला है
चल पड़ा हूँ, लक्ष्य भूलूँ? ना गवारा
*

पाँव हैं कमजोर तो बल हाथ का ले
थाम छड़ियाँ खड़ा पैरों पर दुबारा
*

साथ दे जो मुसीबत में वही अपना
दूर बैठा गैर, चुप देखे नज़ारा
*

मैं नहीं निर्जीव, हूँ संजीव जिसने
अवसरों को खोजकर फिर-फिर गुहारा
*

शक्ति हो तब संग जब कोशिश करें खुद
सफलता हो धन्य जब मुझको निहारा
*

कोई टिप्पणी नहीं: