शुक्रवार, 27 जुलाई 2018

kavita: purush

एक रचना 
पुरुष 
*
तुम्हें न देखूँ 
तो शिकायत 
किया करता हूँ अदेखा
पुरुष हूँ न.
.
तुम्हें देखूँ
तो शिकायत
देखता हूँ
पुरुष हूँ न.
.
काश तुम लो
आँख मुझसे फेर
मुझको कर अदेखा
जी सकूँ मैं चैन से
पुरुष हूँ न.
***
salil.sanjiv@gmail.com
#दिव्यनर्मदा
#हिंदी_ब्लॉगर

कोई टिप्पणी नहीं: