शुक्रवार, 27 जुलाई 2018

kshanika

क्षणिकाएँ...
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१. वंदना
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कर पाता दिल 
अगर वंदना
तो न टूटता
यह तय है.
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२. समाधान
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निंदा करना
बहुत सरल है.
समाधान ही
मुश्किल है.
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३. सियासत -१
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असंतोष-कुंठा
कब उपजे?
बूझे कारण कौन?
'सलिल' सियासत
स्वार्थ साधती
जनगण रहता मौन.
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४. सियासत -२
तुम्हारा हर झूठ
सच है
हमारा हर सच
झूठ है
यही है आज की
सियासत
दोस्त ही
करता अदावत.
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५.. शब्द सिपाही
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मैं हूँ अदना
शब्द-सिपाही.
अर्थ सहित दें
शब्द गवाही..
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अंतिम दो देवी नागरानी जी ने सिंधी में अनुवादित कर आमने-सामने काव्य संग्रह में मूल सहित प्रकाशित कीं.
सियासत
तुंहिजो हर हिकु झूठ
सचु आहे
मुंहिंजो हर हिकु सचु
झूठ आहे
इहाई आहे
अजु जी सियासत
दोस्त ई
कन दुश्मनी
*
लफ्ज़न जो सिपाही
*
मां आहियाँ अदनो
लफ्जन जो सिपाही.
अर्थ साणु डियन
लफ्ज़ गवाही.
*
salil.sanjiv@gmail.com
#दिव्यनर्मदा
#हिंदी_ब्लॉगर

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