गुरुवार, 26 जुलाई 2018

द्विपदी ग़ज़ल

द्विपदी 
गजल 
*
ग़ज़ल कहती न तू आ भा, ग़ज़ल कहती है जी मुझको 
बताऊँ मैं उसे कैसे, जिया है हमेशा तुझको

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