बुधवार, 13 दिसंबर 2017

navgeet- gittee sadakon ki

नवगीत
गिट्टी सड़को की
.
कुटती-पिटती,
दबती जाए
गिट्टी सड़कोँ की.
.
चोटें सहती,
पीर न कहती,
ठेकेदार करे हँस ठट्ठा,
सोचे जड़ में डालू मट्ठा
सुध आती भूखी बिटिया की
गुपचुप दहती.
बिखरी-सिहरी
घुलती जाए
मिट्टी सड़कोँ की.
.
अफ़सर रोलर,
नेता ठोकर,
चीरहरण चाहे दुर्योधन,
कहीं नहीं दिखते मनमोहन,
कुटिल दुशासन आँख तरेरे,
दरुआ ब्रोकर.
सिमटी-सिकुडी,
फ़िर भी चुभती,
चिट्ठी सड़कोँ की.
.
सह एकाकी
ताका-ताकी,
पाकर अवसर कोई न छोड़े,
पत्रकार भी हाथ मरोड़े,
लाज लीलने नेता दौड़े,
लुकती-छिपती.
कहीं न टिपती,
कहीं न टिकती,
बिट्टी सड़कोँ की
...
संजीव, 9425183244
www.divyanarmada.in
#हिन्दी_ब्लोगर

कोई टिप्पणी नहीं: