शनिवार, 2 जून 2018

नवलेखन: सड़गोड़ासनी

नवलेखन: सड़गोड़ासनी
परिचय:
सड़गोड़ासनी बुंदेली भाषा का छंद है जिसे आधुनिक हिंदी में नहीं लिखा गया है। 'षड्' अर्थात छ:, षडानन, षड् राग आदि सर्वविदित हैं। लोकभाषा में 'ष' का उच्चारण 'स' या 'ख' किया जाता है। तभी सावन, खडानन, खटरागी जैसे शब्द बनते हैं। 'गोड़' अर्थात 'पैर' या 'पद'। सड़ + गोड़' + आसनी अर्थात छ: पंक्तियों पर आसीन छंद 'षड्पदी'। दोहा तथा रोला के सम्मिलन से बनी कुंडलिया भी 'षड्पदी' है।
विधान:
सड़गोड़ासनी मात्रिक छंद है। इसके मुखड़े में पंद्रह - बारह मात्रा पर यति का विधान है। शेष पंक्तियों में सोलह - बारह की यति होती है। प्रथम अर्धाली हर पंक्ति-युग्म के बाद दोहराई जाती है। प्रथम अर्धाली में पाँचवी-छठी मात्रा गुरु तथा सातवीं मात्रा लघु रखना आवश्यक है।
विशेष:
सड़गोड़ासनी दादरा ताल,  छ: मात्रा की बंदिश में  गाया जाता है। सड़गोड़ासनी वसंत का छंद होते हुए भी हर मौसम-पर्व पर गाया जाता है। सड़गोड़ासनी नृत्य-गीत है। इसके साथ मृदंग,  टिमकी, झांझ,  मँजीरा आदि लोकवाद्य बजाए जाते हैं । यह पुरुष तथा महिला दोनों के लिए है।
दादरा के बोल हैं ''धा धी ना ता ती ना'' जबकि सड़गोड़ासनी के बोल हैं ''धन ग्ग धन ग न,  ति क्क ति क न''। सड़गोड़ासनी में  प्रयुक्त बोल का आवर्त, दादरा में प्रयुक्त आवर्तों का दोगुना है। सामान्यतः महिलाएँ भक्ति व श्रंगारपरक सड़गोड़ासनी शुद्ध दादरा में गाती हैं तथा ढोलक,  मजीरा, पीतल का लोटा आदि वाद्य प्रयोग करती हैं। पुरुष नृत्य की भावमुद्राओं को प्रमुखता देते हुए सड़गोड़ासनी में प्राण फूँक देते हैं।
उदाहरण:
भारत देश, हमको प्यारा,
सब जग से है न्यारा।
भारत देश हमको प्यारा...
*
ध्वजा तिरंगी फहरे फर-फर,
मेघ करें जयकारा।
भारत देश हमको प्यारा...
*
मन मोहे सिर ताज हिमालय,
सागर चरण पखारा।
भारत देश हमको प्यारा...
*
बहे नदी नरमदा मध्य में, 
जीवन दे जलधारा।
भारत देश हमको प्यारा...
*
हम हैं एक; अनेक भले ही,
भाषा-वसन हमारा।
भारत देश हमको प्यारा...
*
धर्म कला साहित्य मनोहर,
शाश्वत ग्यान हमारा।
भारत देश हमको प्यारा...
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