सोमवार, 4 जून 2018

सड़गोड़ासनी 2

सड़गोड़ासनी 2
रेवा माइ 
*
रेवा माइ पत रख लइयो,
कलकल कलकल बइयो।
रेवा माइ पत रख लइयो...
*
मात-पिता, गुरु, बंधु-सखा तुम,
कब का करना; कइयो।
रेवा माइ पत रख लइयो...
*
गौरा-बौरा औढरदानी,
किरपा तनक दिलइयो।
रेवा माइ पत रख लइयो...
*
अमरकंटकी! संकट हरियो, 
बरखा खूब करइयो।
रेवा माइ पत रख लइयो...
*
परबत-परबतजंगल-दूबा,
भू खों बसन उढ़इयो।
रेवा माइ पत रख लइयो...
*
पुरबैया-पछुवा-मलयज सँग
मिल बंबुलिया गइयो।
रेवा माइ पत रख लइयो...
*
कोदों-कुटकी; ज्वार-बाजरा,
महुआ-मका पकइयो।
रेवा माइ पत रख लइयो...
*
मोंड़ा-मोंड़ी, डुकरा-डुकरी,
डौकी सँग हँस रइयो।
रेवा माइ पत रख लइयो...
*
टिमकी-मादल, झाँझ-मँजीरा,
बाजे; नाच-नचइयो।
रेवा माइ पत रख लइयो...
*
कोउ नें अफरे, कोई नें भूखा
सोए; बात बनइयो।
रेवा माइ पत रख लइयो...
*
गिरे-परे की कछू नें चिंता, 
मंजिल लौं पहुँचइयौ।
रेवा माइ पत रख लइयो... 
*
तुम बिन कौन सहारा जग में
नैया पार करइयो।
रेवा माइ पत रख लइयो...
***
4.6.2018, 7999559618
salil.sanjiv@gmail.com 

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