मंगलवार, 19 जून 2018

गीत:

गीत
बहुत हुआ
*
बहुत हुआ
तज दो मुगालता,
पत्थर बने ईंट का उत्तर....
*
जन-जनार्दन पूछ रहा है
कहाँ गए वे तेवर बागी?
जो कहते थे शत्रु-भूमि पर
होगा युद्घ, लगेगी आगी।
भगवा क्यों मोहित सत्ता पर,
दल-हित का ही क्यों अनुरागी?
जान हथेली पर रखने की
तजी विरासत क्यों बैरागी?
अपने हाथ
बाँधकर बैठे
अरि देता घर में घुस टक्कर...
*
हिरणकशिपु को उसके घर जा
हरि ने मारा बिना गँवा क्षण।
बलि को उसके ही महलों में
वामन निबल करें, बिन खो तृण।
अरि-घर में घुस आग लगाते
पवनपुत्र का करो अनुसरण।
छोड़ अयोध्या; लंका जाकर
दिया राम ने रण-आमंत्रण।
हो परंपरा
अनुयायी यदि
क्यों बैठे हो घर में घुसकर....
*
अगवा हुई शांति की सीता
भगवा बैठा शस्त्र झुकाए।
चीरहरण क्यों देख रहे हैं
भीमार्जुन चुप दृष्टि चुकाए?
धृतराष्ट्रों की ओर न देखो
तुमने जब भी शस्त्र उठाए,
एकांकी बर्बर दैत्यों के
खून से योगिनी नाच-नहाए।
संशय तजकर
पार्थ शस्त्र ले
जय वर दो प्रश्नों के उत्तर....
19.6.2018, 7999559618

कोई टिप्पणी नहीं: