शुक्रवार, 29 जून 2018

sadgodasani

सड़गोड़ासनी:
बुंदेली छंद, विधान: मुखड़ा १५-१६, ४ मात्रा पश्चात् गुरु लघु अनिवार्य,
अंतरा १६-१२, मुखड़ा-अन्तरा सम तुकांत .
*
जन्म हुआ किस पल? यह सोच
मरण हुआ कब जानो?
*
जब-जब सत्य प्रतीति हुई तब
कह-कह नित्य बखानो.
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जब-जब सच ओझल हो प्यारे!
निज करनी अनुमानो.
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चलो सत्य की डगर पकड़ तो
मीत न अरि कुछ मानो.
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देख तिमिर मत मूँदो नयना
अंतर-दीप जलानो.
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तन-मन-देश न मलिन रहे मिल
स्वच्छ करेंगे ठानो.
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ज्यों की त्यों चादर तब जब
जग सपना विहँस भुलानो.
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२९.६.२०१८, ७९९९५५९६१८
salil.sanjiv@gmail.com

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