शनिवार, 14 अक्तूबर 2017

hindi ke naye chhand 9: narmada chhand

हिंदी के नए छंद ९ 

पाँच मात्रिक याज्ञिक जातीय  नर्मदा छंद  
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हिंदी में पहली बार पञ्च मात्रिक छंदों का सृजन कर विधान और उदहारण सहित प्रस्तुत किया गया है। आप भी इन छंदों के आधार पर रचना करें । शीघ्र ही हिंदी छंद कोष प्रकाशित करने का प्रयास है जिसमें सभी पूर्व प्रचलित छंद और नए छंद एक साथ रचनाविधान सहित उपलब्ध होंगे।
छंद रचना सीखने के इच्छुक रचनाकार इन्हें रचते चलें तो सहज ही कठिन छंदों को रचने की सामर्थ्य पा सकेंगे। भवानी, राजीव, साधना, हिमालय, आचमन, ककहरा, तुहिनकण व अभियान छंद के पश्चात प्रस्तुत है- 

नर्मदा छंद 
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विधान:
प्रति पद ५ मात्राएँ।
पदादि, पदांत, गति, यति संबंधी बंधन नहीं। पूर्व में वर्णित पाँच मात्रिक आठों छंदों में से किसी भी ह्ह्न्द की पंक्तियों का निश्चित क्रम में उपयोग। 

उदाहरण:
गीत-
नर्मदा! 

शत नमन। 
वर्मदा! 
नित नमन। 
*
आइए! 
पूजिए। 
गीत भी 
गाइए। 
धार को 
साफ़ रख 
शांति भी 
पाइए। 
शर्मदा! 
शत नमन। 
धर्मदा 
नित नमन। 
*
घाट आ 
बैठिए। 
रूप भी 
देखिए। 
रूपसी 
सी सजी। 
माँ सदा 
लेखिए। 
कर्मदा! 
शत नमन। 
हर्म्यदा 
नित नमन।  
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salil.sanjiv@gmail.com, ९४२५१८३२४४
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