शुक्रवार, 27 अक्तूबर 2017

doha

दोहा सलिला
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ताज न मंदिर-मकबरा, मात्र इमारत भव्य भूल सियासत देखिए, कला श्रेष्ठ शुचि दिव्य
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नेताओं से लीजिए, भत्ता-सुविधा छीन भाग जाएँगे चोर सब, श्रेष्ठ सकें हम बीन
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एंकर अनुशासित रहे, ठूँसे नहीं विचार वक्ता बोले विषय पर, लोग न हों बेज़ार
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जानकार वक्ता रहें, दलगत करें न बात सच उद्घाटित हो तभी, सुधर सकें हालात
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हम भी जानें बोलना, किंतु बुलाये कौन? घिसे-पिटे चेहरे बुला, सच को करते मौन
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केंद्र-राज्य में भिन्न दल, लोकतंत्र की माँग एक न मनमानी करे, खींच न पाए टांग
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salil.sanjiv@gmail.com, ९४२५१८३२४४
www.divyanarmada.in, #हिंदी_ब्लॉगर

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