सोमवार, 23 अक्तूबर 2017

मुक्तक

बेखुदी1 तारीकियो2 से मिल गले जब हँस पडी
ज़िन्दगी मायूस3 बोली- दो जरा ज़िन्दादिली
गफ़लती4 के ठाठ पर दू वार5 सारी कायनात6
अक्स7 करते रक्स8 देखूँ चाहता दिल दिल्लगी

1. बेसुध, 2. अँधेरे, 3. निराश,  4. अनजानी त्रुटि, 5. निछावर, 6. सृष्टि, 7. प्रतिबिंब, 8. नृत्य, 9. मजाक.
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