गुरुवार, 26 अक्तूबर 2017

नये सवैये

लहर-लहर लहरित सलिल,  अमल-विमल कलकल सतत,  निरख-निरख जन-मन मुदित.
घहर-घहर घरशित सरित,  छिटक-छिटक प्रमुदित अमित,  बिखर-बिखर कण-कण क्षरित.
चरण-चरण कर सुख वरण, कदम-कदम हर दुख हरण, सिहर-सिहर तृण-तृण दमित.
बरस-बरस जलधर धवल, तरुवर मुरझित बढ़ हरित, मरु-गुलशन कर रवि उदित.
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salil.sanjiv@gmail.com,9425183244
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