मंगलवार, 3 अक्तूबर 2017

drushya kavya teer alankar

अभिनव प्रयोग 
दृश्य काव्य- 
तीर अलंकार 
*
मैं 
बच्चा,
बचपन
से दूर हूँ।
मत समझो
बेबस-मजबूर हूँ।
दुनिया बदल सकता
मेहनत से अपनी।
कहूँगा समय से
कल- देख ले!
मैं भी तो
मशहूर
हूँ।
*
** 
salil.sanjiv@gmail.com
२०४ विजय अपार्टमेंट, नेपियर टाउन, जबलपुर 
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