गुरुवार, 12 अक्तूबर 2017

muktika

मुक्तिका   
मुस्कान
संजीव 'सलिल'
जिस चेहरे पर हो मुस्कान,
वह लगता हमको रस-खान..
अधर हँसें तो लगता है-
हैं रस-लीन किशन भगवान..
आँखें हँसती तो दिखते -
उनमें छिपे राम गुणवान..
उमा, रमा, शारदा लगें
रस-निधि कोई नहीं अनजान..
'सलिल' रस कलश है जीवन
सुख देकर बन जा इंसान..
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salil.sanjiv@gmail.com, 9425183244 
http://divyanarmada.blogspot.com
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