शनिवार, 12 अगस्त 2017

geet

गीत:

हिन्दी ममतामय मैया है...
 

संजीव 'सलिल'
 
*

हिंदी ममतामय मैया है 
मत इससे खिलवाड़ करो...
*
सूर कबीर रहीम देव
तुलसी से बेटों की मैया.
खुसरो बरदाई मीरां
जगनिक खेले इसकी कैंया.

घाघ भड्डरी ईसुरी गिरिधर
जगन्नाथ भूषण मतिमान.
विश्वनाथ श्री क्षेमचंद्र
जयदेव वृन्द लय-रस की खान.

जायसी रायप्रवीण बिहारी
सेनापति बन लाड़ करो.
हिंदी ममतामय मैया है
मत इससे खिलवाड़ करो...
*
बिम्ब प्रतीक व्याकरण पिंगल
क्षर-अक्षर रसलीन रहो.
कर्ताकारक कर्म क्रिया उपयुक्त
न रख क्यों दीन रहो?

रसनिधि शब्द-शब्द चुनकर
बुनकर अभिनव ताना-बाना.
बन जाओ रसखान काव्य की 
गगरी निश-दिन छलकाना.

तत्सम-तद्भव लगे डिठौना
किन्तु न तिल को ताड़ करो.
हिंदी ममतामय मैया है
मत इससे खिलवाड़ करो...
*

जिस ध्वनि का जैसा उच्चारण
वैसा लिखना हिन्दी है.
जैसा लिखना वैसा पढ़ना
वही समझना हिंदी है.

मौन न रहता कोई अक्षर,
गिरता कोई हर्फ़ नहीं.
एक वर्ण के दो उच्चारण
दो उच्चारो- वर्ण नहीं.

करो 'सलिल' पौधों का रोपण,
अब मत रोपा झाड़ करो.
हिंदी ममतामय मैया है
मत इससे खिलवाड़ करो...
*
salil.sanjiv@gmail.com, ९४२५१८३२४४
http://divyanarmada.blogspot.com

#हिंदी_ब्लॉगर 

कोई टिप्पणी नहीं: