शनिवार, 19 अगस्त 2017

doha

भोजपुरी दोहा:
रखि दिहली झकझोर के, नेता भाषण बाँच
चमचा बदे बधाइ बा, तनक न देखल साँच
*
चिउड़ा-लिट्ठी ना रुचे, बिरयानी की चाह
नवहा मलिकाइन चली, घर फूँके की राह
*
पनहा ठंडाई भयल, पिछड़े की पहचान
कोला पेप्सी पेग भा, अगड़े बर अरमान
*
महिमा आपन देस बर, गायल बेद पुरान
रउआ बिटुआ के बरे, पच्छिम भयल महान
*
राम नाम के भजलऽ ना, पीटत छतिया व्यर्थ
हाथ जोड़ खखनत रहब, केहु ना सुनी अनर्थ
*
मँहगाई ससुरी गइल, भाईचारा लील
प्याज-टमाटर भूलि गै, चँवरो-अटवा गील
*
तार-तार रिश्ता भयल,भाई-भाई में रार
बंगला बनल वकील बर, आपन चढ़ल उधार
*
बुरा बतावल बुराई, दूसर के आसान
जे अपने बर बुराई, देखल वही सयान
*
जे अगहर बा ओकरा, बाकी खेंचल टाँग
बढ़े न, बाढ़न दे तनक, घुली कुँए मा भाँग
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salil.sanjiv@gmail.com
http://divyanarmada.blogspot.com
#हिंदी_ब्लॉगर

1 टिप्पणी:

Kavita Rawat ने कहा…

बहुत अच्छे चिंतनशील भोजपुरी दोहे पढ़वाने के लिए धन्यवाद!
आपको जन्मदिन की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं!