बुधवार, 24 सितंबर 2014

navgeet: sanjiv

नवगीत  
संजीव
*
इसरो को शाबाशी 
किया अनूठा काम 

'पैर जमाकर 
भू पर
नभ ले लूँ हाथों में' 
कहा कभी 
न्यूटन ने 
सत्य किया 
इसरो ने 

पैर रखे 
धरती पर 
नभ छूते अरमान 
एक छलाँग लगाई 
मंगल पर 
है यान 

पवनपुत्र के वारिस
काम करें निष्काम 

अभियंता-वैज्ञानिक 
जाति-पंथ 
हैं भिन्न 
लेकिन कोई 
किसी से 
कभी न 
होता खिन्न 

कर्म-पुजारी 
सच्चे 
नर हों या हों नारी 
समिधा 
लगन-समर्पण 
देश हुआ आभारी 

गहें प्रेरणा हम सब 
करें विश्व में नाम 
** 

1 टिप्पणी:

Prem Pushp Chaswal ने कहा…


Prem Pushp Chaswal

वाह सलिल भाई, बहुत ख़ूब!!


पुष्प राज चसवाल एवं डॉ प्रेम लता चसवाल 'प्रेम पुष्प'
संपादक द्वय: अनहद कृति
(www.anhadkriti.com)