रविवार, 28 सितंबर 2014

navgeet:

नवगीत:

राजनीति की रानी
तुझको
कारावास मिला

खरबों लूट
करोड़ों बाँटे
अपने छोड़
गैर को डाँटे

अंगुली एक
उठी औरों पर
देख-दिखाओ
खुद पर केंद्रित
तीन छिपाओ 

पाखंडों के
कुछ पंडों को
थोड़ा त्रास मिला

जनगण बेहद
खुश- सच मानो
चमचों व्यर्थ
विरोध न ठानो

करे अदालत
थोड़ी जल्दी
साफ़-सफाई
रिश्वतखोरों
आफत आयी

आम आदमी के
अधरों पर
हास खिला

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