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रविवार, 14 जून 2020

मुक्तक

चंद मुक्तक
संजीव 'सलिल'
*
*
कलम
तलवार से ज्यादा, कहा सच वार करती है.
जुबां नारी की लेकिन सबसे
ज्यादा धार धरती है.
महाभारत कराया द्रौपदी के व्यंग बाणों ने-
नयन
के तीर छेदें तो न दिल की हार खलती है..
*
कलम नीलाम होती रोज
ही अखबार में देखो.
खबर बेची-खरीदी जा रही बाज़ार में लेखो.

माखनलाल जी ही हैं, नहीं विद्यार्थी जी हैं-
रखे अख़बार सब गिरवी
स्वयं सरकार ने देखो.

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