सोमवार, 24 सितंबर 2018

कायस्थों के कुलनाम उपनाम
 कुलनाम और उपनाम- कायस्थों के कई उपनाम या कुलनाम उनके कार्य से जुड़े रहे हैं. यह भी उनमें से एक है. जिनसे कानून संबंधी सलाह ली जाती थी वे कानूनगो, जिनसे राय महत्वपूर्ण मसलों पर जरूरी समझी जाती थी वे रायजादा, जिन्हें जागीरें बख्श दी गयी थीं, वे बख्शी, जिनका व्यवहार बहुत अच्छा था वे व्यवहार (ब्योहार बुंदेली रूप), जीने पास वास्तव में 'श्री' (धन-विद्या दोनों) थी वे श्रीवास्तव, जो जुझारू तथा सभ्य थे वे भटनागर, जिनका आचार-व्यवहार खरा (ईमानदार) था वे खरे, जो परोपकारी (सहायक) थे वे सहाय, जो विष्णु भक्त थे वे नारायण, जो कलाप्रेमी (गुणवान) थे वे रंजन तथा सारंग, जो पराक्रमी थे वे बहादुर, जो भक्त (धार्मिक) थे वे प्रसाद आदि उपाधियों से जाने गए. एक से अधिक जातियों में समान गुण पाए जाने पर ये उपनाम कायस्थों और गैर कायस्थों दोनों में मिलते हैं. जैसे वर्मा (दूसरों की रक्षा करने वाले) कायस्थ, जाट आदि हैं, सिंह (सिन्हा) कायस्थ, राजपूत दोनों हैं. माथुर कायस्थ और वैश्य हैं.कायस्थों में अल्ल, वैश्यों में आँकने भी होते हैं. सभी वर्णों न गोत्र भी होते हैं. इन सबका अलग-अलग अर्थ है किन्तु आजके समय में लोग न तो इन्हें जानते हैं, न मानते हैं.

कोई टिप्पणी नहीं: