शनिवार, 29 सितंबर 2018

lokgeet

* लोकगीत:  
पोछो हमारी कार.....
संजीव 'सलिल'
*
ड्राइव पे तोहे लै जाऊँ, 
ओ सैयां! पोछो हमारी कार.  
पोछो हमारी कार, 
ओ बलमा! पोछो हमारी कार.....
*
नाज़ुक-नाज़ुक मोरी कलाई,
गोरी काया मक्खन-मलाई. 
तुम कागा से सुघड़, कहे जग-
'बिजुरी-मेघ' पुकार..  
ओ सैयां! पोछो हमारी कार.  
पोछो हमारी कार, 

ओ बलमा! पोछो हमारी कार..... *
संग चलेंगी मोरी गुइयां,
तनक न हेरो बिनको सैयां.
भरमाये तो कहूँ राम सौं-
गलन ना दइहों दार..
ओ सैयां! पोछो हमारी कार.
पोछो हमारी कार, 
 ओ बलमा! पोछो हमारी कार.....
*
बनो डिरेवर, हाँको गाड़ी.
कैहों सबसे बलमा अनाड़ी'.
'सलिल' संग केसरिया कुल्फी-
खैहों, करो न रार..
ओ सैयां! पोछो हमारी कार.
पोछो हमारी कार, 
ओ बलमा! पोछो हमारी कार.....
*

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