शनिवार, 29 सितंबर 2018

doha

दोहा 
*
मिलते हैं जगदीश यदि, मन में हो विश्वास
सिया-राम-जय गुंजाती, जीवन की हर श्वास 
*
आस लखन शत्रुघ्न फल, भरत विनम्र प्रयास 
पूर्ण समर्पण पवनसुत, दशकंधर संत्रास 
*
त्याग-ओज कैकेई माँ, कौसल्या वनवास 
दशरथ इन्द्रिय, सुमित्रा है कर्तव्य-उजास 
*
संयम-नियम समर्पिता, सीता-तनया हास 
नेह-नर्मदा-सलिल है, सरयू प्रभु की ख़ास 
*
वध न अवध में सत्य का, होगा मानें आप 
रामालय हित कीजिए, राम-नाम का जाप 
*****
salil.sanjiv@gmail.com
http://divyanarmada.blogspot.com

कोई टिप्पणी नहीं: