शुक्रवार, 7 सितंबर 2018

vimarsh

विमर्श:
देवताओं को खुश करने पशु बलि बंद करो : हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय 
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने २०१४ में दिए एक निर्णय में देवताओं को प्रसन्न करने के लिए की जानेवाली पशुबलि पर प्रतिबंध लगाते हुए कहा है कि हजारों पशुओं को बलि के नाम पर मौत के घाट उतरा जाता है। इसके लिए पशुओं को असहनीय पीड़ा सहनी पड़ती है। न्यायमूर्ति द्वय राजीव शर्मा और सुरेश्वर ठाकुर की खंडपीठ के अनुसार इस सामाजिक कुरीति को समाप्त किया जाना जरूरी है। न्यायालय ने आदेश किया है कि कोई भी पशुओं की बलि नहीं देगा।

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीशों के निर्णय के मुताबिक पशुओं को हो रही असहनीय पीड़ा और मौत देना सही नहीं है। प्रश्न यह है कि क्या केवल देव-बलि के लिए अथवा मानव की उदरपूर्ति लिए भी? देव-बली के नाम पर मा रहे हजारों जानवर बच जाएँ और फिर मानव भोजन के नाम पर मारे जा रहे जानवरों के साथ मारे जाएँ तो निर्णय बेमानी हो जायेगा। यदि सभी जानवरों को किसी भी कारण से मारने पर प्रतिबंध है तो मांसाहारी लोग क्या करेंगे? क्या मांसाहार बंद किया जायेगा?
इस निर्णय का यह अर्थ तो नहीं है कि हिंदू मंदिर में बलि गलत और बकरीद पर मुसलमान बलि दे तो सही? यदि ऐसा है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। आप सोचें और अपनी बात यहाँ कहने के साथ संबंधित अधिकारियों, समाचार माध्यम और जनप्रतिनिधियों तक भी पहुँचाइए।

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