शनिवार, 29 सितंबर 2018

doha salila

दोहा सलिला 
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श्याम-गौर में भेद क्या, हैं दोनों ही एक 
बुद्धि-ज्ञान के द्वैत को, मिथ्या कहे विवेक
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राम-श्याम हैं एक ही, अंतर तनिक न मान 
परमतत्व गुणवान है, आदिशक्ति रसखान
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कृष्ण कर्म की प्रेरणा, राधा निर्मल नेह 
सँग अनुराग-विराग हो, साधन है जग-देह
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कण-कण में श्री कृष्ण हैं, देख सके तो देख 
करना काम अकाम रह, खींच भाग्य की रेख
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मुरलीधर ने कर दिया, नागराज को धन्य 
फण पर पगरज तापसी, पाई कृपा अनन्य
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आत्म शक्ति राधा अजर, श्याम सुदृढ़ संकल्प 
संग रहें या विलग हों, कोई नहीं विकल्प
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हर घर में गोपाल हो, मातु यशोदा साथ 
सदाचार बढ़ता रहे, उन्नत हो हर माथ
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मातु यशोदा चकित चित, देखें माखनचोर
दधि का भोग लगा रहा, होकर भाव विभोर
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