सोमवार, 26 नवंबर 2018

doha muktika

दोहा मुक्तिका
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स्नेह भारती से करें, भारत माँ से प्यार। 
छंद-छंद को साधिये, शब्द-ब्रम्ह मनुहार।।
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कर सारस्वत साधना, तनहा रहें न यार।
जीव अगर संजीव हों, होगा तब उद्धार।।
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मंदिर-मस्जिद बन गए, सत्ता हित हथियार।।
मन बैठे श्री राम जी, कर दर्शन सौ बार।।
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हर नेता-दल चाहता, उसकी हो सरकार।।
नित मनमानी कर सके, औरों को दुत्कार।।
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सलिला दोहा मुक्तिका, नेह-नर्मदा धार।
जो अवगाहे हो सके, भव-सागर से पार।।
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संजीव
२५.११.२०१८

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