बुधवार, 28 नवंबर 2018

एक रचना

नागनाथ साँपनाथ, जोड़ते मिले हों हाथ, मतदान का दिवस, फिर निकट है मानिए। 

चुप रहे आज तक, न रहेंगे अब चुप, ई वी एम से जवाब, दें न बैर ठानिए।।

सारी गंदगी की जड़, दलवाद है 'सलिल', नोटा का बटन चुन,  निज मत बताइए- 

लोकतंत्र जनतंत्र, प्रजातंत्र गणतंत्र, कैदी न दलों का रहे, नव आजादी लाइए।।                                         ***                                                              संजीव, २८-११-२०१८।      http://divyanarmada.blogspot.in/

कोई टिप्पणी नहीं: