सोमवार, 5 नवंबर 2018

dhan teras

धन तेरस पर नव छंद 
गीत 
*
षड्मात्रिक रागी जातीय रविशंकर छंद 
सूत्र: सलल 
***
धन तेरस
बरसे रस... 
*
मत निन्दित
बन वन्दित।
कर ले श्रम
मन चंदित।
रचना कर
बरसे रस।
मनती तब
धन तेरस ... 
*
कर साहस
पा ले यश। 
ठुकरा मत
प्रभु हों खुश।
मन की सुन
तन को कस।
असली तब
धन तेरस ...   
 *
सब की सुन
कुछ की गुन।
नित ही नव
सपने बुन। 
रख चादर
जस की तस। 
उजली तब
धन तेरस
***
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