शनिवार, 10 नवंबर 2018

muktika piyushvarsha

मुक्तिका
छंद: महापौराणिक जातीय पीयूषवर्ष छंद
मापनी: २१२२ २१२२ २१२
बह्र: फ़ायलातुन् फ़ायलातुन् फायलुन्
*
मीत था जो गीत सारे ले गया
ख्वाब देखे जो हमारे ले गया
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दर्द से कोई नहीं नाता रखा
वस्ल के पैगाम प्यारे ले गया
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हारने की दे दुहाई हाय रे!
जीत के औज़ान न्यारे ले गया
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ताड़ मौका वार पीछे से किया
फोड़ आँखें अश्क खारे ले गया
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रात में अच्छे दिनों का वासता
वायदों को ही सकारे ले गया
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बोल तो जादूगरी कैसे करी
पूर्णिमा से ही सितारे ले गया
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साफ़ की गंगा न थोड़ी भी कहीं
गंदगी जो थी किनारे ले गया
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संजीव, १०.११.२०१८

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