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शनिवार, 15 जुलाई 2017

hasya kavita

हास्य रचनाः
नियति
संजीव
*
सहते मम्मी जी का भाषण
पूज्य पिताश्री का फिर शासन
भैया-जीजी नयन तरेरें,
भौजी भी लगवाये फेरे
बंदा हलाकान हो जाये,
एक अदद तब बीबी पाये
सोचे धौंस जमाऊँ इस पर,
नचवाये वह आँसू भरकर
चुन्नू-मुन्नू बाल नोच लें,
मुन्नी को बहलाये गोद ले
कही पड़ोसी कहें न द्ब्बू,
लड़ता सिर्फ इसलिये बब्बू
झूल रहा है जैसे साहुल
डरकर है अनब्याहा राहुल
***
१५-७-२०१४
salil.sanjiv@gmail.com
#हिंदी_ब्लॉगर

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