मंगलवार, 4 जुलाई 2017

mukatak

मुक्तक लोम-विलोम: जड़-चेतन
(१) जड
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जड़ बन जड़ मत खोदिए, जड़ चेतन का मूल।
जड़ बिन खड़ा गिरे तुरत, करिए कभी न भूल।।
जमीं रहे जड़ जमीन में, हँस छू लें आकाश-
जड़ता तज चेतन बनें, नाहक मत दें तूल।।
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(२) चेतन
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चेत न मन सोया बहुत अब चेतन हो जाग।
डूब नहीं अनुराग में, भाग न वर वैराग।।
सतत समन्वय-संतुलन से जीअवन हो पूर्ण-
'सलिल' न जल में डूबना, नहीं लगाना आग।।
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